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#जय श्री राम पहले लोग प्रतिज्ञा लेते थे और उसके लिए कुछ भी क़ीमत देने को तैयार रहते थे बाद में कसमें वादों नें उसका स्थान ले लिया वो भी कुछ हद तक सही था परन्तु ज़ब से शपथ लेने की परम्परा आई लोग नीचे से नीचे गिरने को तैयारहो गए, तथाकथित लोकतंत्र में शपथ धारियों की बड़ी जमात हैं लेकिन उनका चरित्र दो कोड़ी का, पहले समाज में गंगा जल, या मंदिर में जाने की बात से ही सच बोल देते थे क्योंकि लोग डरते थे और यहीं भय समाज में नियंत्रण स्थापित करता था लेकिन आजकल संसद हो या ग्राम प्रधान सभी शपथ लेते हैँ लेकिन सिर्फ लेते हैँ सत्य निष्ठा, ईमानदारी, लगन की लेकिन उसके उलट आचरण करते हैँ! सत्यनिष्ठा में जीने के लिए क़ीमत चुकानी पड़ती हैं जो कि कमजोर लोगों के बस की बात नहीं होती हैं इसलिए वो बच निकलते हैँ! यही खुद का बचाव कायरता कहलाता हैं, महाभारत में महारथी कहा जाता था जो प्रतिज्ञा बद्ध होते थे, रामयण तो महावीरों की महा गाथा है आज किसी को घर से निकाल दिया जाय तो वो न्यायलय में केस कर देगा मीडिया बुला लेगा और हपतो बहस का मुद्दा बन जाता हैं लेकिन राम नें तो सहज वचन स्वीकार कर लिया प्रतिज्ञा भी न किये, जो सहज सरल हैं वही शुभ का हेतु भी हैं! आजकल और कल में अंतर स्पष्ट हैं अब तो हल्की हवा चली नहीं कि सब उड़ गया! राम राम 🙏🙏
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