#❤️जीवन की सीख
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चिन्तनेनैधते चिन्ता त्विन्धनेनेव पावकः।
नश्यत्यचिन्तनेनैव विनेन्धनमिवानलः।।
अर्थात् 👉🏻 चिंता को चिंतन ( सोच-विचार ) से बढ़ावा मिलता है , जैसे आग को ईंधन से बढ़ावा मिलता है । तथा चिंता को न सोचने से वह समाप्त हो जाती है , जैसे ईंधन के अभाव में आग बुझ जाती है ।
🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄
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