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#जय माँ गायत्री जय गुरुवर
जय माँ गायत्री जय गुरुवर - जब मगन भाई देसाई दादागुरु য নিলন उत्तरकाशी गये परम् पूज्य गुरुदेव क गुरु स्वामा प्रतिक्षा करते रहे। जैसी शक्ल सर्वैश्वरानंदजी से मिलने की बताईं गईं थीं॰ उसी शक्ल के जिज्ञासा गुजरात के मगन भाई श्वेत केशधारी बाबा प्रकट हुए, सफेद वस्त्रों गें भिक्षा ली और देसाई ने गुरुदेव से की तो तेजी से चलें गये, मगन भाईको गुरुदेव ने उनसे कहा - मुझे आश्चर्य हुआ कि तेजी से किधर देखकर मेरे अंदरही उनकी निकल गये और एक कंदरा के अनुभूति कर लें, लेकिन वे जिद पास खड़े होकर चारों ओर दृष्टि परअडे रहे। अंततः गुरुदेव ने दौड़ाने पर एक झाड़ी के पिछे उत्तरकाशी में अमूक स्थान पर देखा तो गुरुदेव स्वयं है और अमूक रुप में अमूक दिन उनके गुरुदेव ने उनसे कहा कि मैं और अन्नक्षेत्र में दिखाई देने की बात मेरी गुरुसत्ता एक ही है।सारी छोड़कर मगन भाई वापस बताईं और कहा कि इसके बाद ٦ शांतिकुंज आएं और गुरुदेव के गहराई में मत जाना। चरणों में गिरकर माफी मांगी। उत्तरकाशी में बताएंगये दिनचे जब मगन भाई देसाई दादागुरु য নিলন उत्तरकाशी गये परम् पूज्य गुरुदेव क गुरु स्वामा प्रतिक्षा करते रहे। जैसी शक्ल सर्वैश्वरानंदजी से मिलने की बताईं गईं थीं॰ उसी शक्ल के जिज्ञासा गुजरात के मगन भाई श्वेत केशधारी बाबा प्रकट हुए, सफेद वस्त्रों गें भिक्षा ली और देसाई ने गुरुदेव से की तो तेजी से चलें गये, मगन भाईको गुरुदेव ने उनसे कहा - मुझे आश्चर्य हुआ कि तेजी से किधर देखकर मेरे अंदरही उनकी निकल गये और एक कंदरा के अनुभूति कर लें, लेकिन वे जिद पास खड़े होकर चारों ओर दृष्टि परअडे रहे। अंततः गुरुदेव ने दौड़ाने पर एक झाड़ी के पिछे उत्तरकाशी में अमूक स्थान पर देखा तो गुरुदेव स्वयं है और अमूक रुप में अमूक दिन उनके गुरुदेव ने उनसे कहा कि मैं और अन्नक्षेत्र में दिखाई देने की बात मेरी गुरुसत्ता एक ही है।सारी छोड़कर मगन भाई वापस बताईं और कहा कि इसके बाद ٦ शांतिकुंज आएं और गुरुदेव के गहराई में मत जाना। चरणों में गिरकर माफी मांगी। उत्तरकाशी में बताएंगये दिनचे - ShareChat