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#गुलज़ार शायरी
गुलज़ार शायरी - के आएं तो , ೯ फुर्सत रंजिशे भूला देना दोस्तों किसी को पता नहीं , सांसो की मोहलत कहां तक है ...!! गुलज़ार के आएं तो , ೯ फुर्सत रंजिशे भूला देना दोस्तों किसी को पता नहीं , सांसो की मोहलत कहां तक है ...!! गुलज़ार - ShareChat