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अनमोल पुस्तक जीने की राह पढ़िए……………) 📖📖📖📖📖 जीने की राह पार्ट - 14 पृष्ठ: 34-35 “विशेष संगम” काम (Sex) प्रक्रिया को विशेष विवेक के साथ समझें। पति-पत्नी मिलन को समाज मान्यता देता है कि आप दोनों परस्पर संतान उत्पन्न करो। सबके माता-पिता ने संतानोत्पत्ति की प्रक्रिया को जिसे संभोग कहते हैं, किया। जिससे अपना तथा अपने भाई-बहनों का जन्म हुआ। तो विचार करें कि यह क्रिया कितनी पवित्र तथा अच्छी है जिससे अपने को अनमोल मानव शरीर मिला है। कोई डॉक्टर बना, कोई सैनिक, कोई मंत्री तो कोई इंजीनियर बना है। कोई किसान बना है जिसने सबको अन्न दिया। कोई मजदूर बना जिसने आपके महल खड़े किए। कोई कारीगर बना। मानव शरीर में हम भक्ति-दान-धर्म के कर्म करके अपने जीवन का कल्याण कर सकते हैं। संभोग क्रिया यह है। इसको कितना ही कपड़ा ओढ़ाकर रागनी गाकर, फिल्मी गाने गा-सुनाकर मलिन वासना रूप दे दी जाती है। यह पर्दे में करना सभ्यता है। पशु-पक्षी प्रजनन क्रिया करते हैं जो खुले में करते हैं जो अच्छा-सा नहीं लगता। मानव सभ्य प्राणी है। उसको पर्दे में तथा मर्यादा में रहकर सभ्यता को बनाए रखना है। उपरोक्त विचार पढ़कर आपमें किसी भी बहन-बेटी-बहू की ओर देखकर अश्लील विचार उत्पन्न नहीं हो सकते। यही क्रिया दादा-दादी ने की जिससे अपने पिता जी का जन्म हुआ। नाना-नानी ने की, जिससे माता जी का जन्म हुआ। जिन माता-पिता ने अपने को उत्पन्न किया, पाला-पोसा। कितने अच्छे हैं अपने माता-पिता जिनकी उत्पत्ति भी काम क्रिया से हुई, तो यह क्या अश्लील है? इसको खानाबदोश लोग अश्लीलता के रूप में पेश कर अश्लील रंग देकर समाज में आग लगाते हैं। ❖ देश के संविधान में प्रावधान है कि यदि कोई पुरुष किसी स्त्री से छेड़छाड़ करता है तो उसे तीन वर्ष की सजा हो जाती है। यदि किसी स्त्री से रेप करता है तो दस वर्ष की सजा होती है। कानून का ज्ञान होने से इंसान बुराई-दुराचार से डरता है। कानून का ज्ञान होना आवश्यक भी है। इस तरह के पाप काल बहा करवाता है। ❖ फिल्म नहीं देखनी है :- फिल्म बनावटी कहानी होती है जिसे देखते समय हम भूल जाते हैं कि जो इनके पात्र हैं, वे रोजी-रोटी के लिए धंधा चला रहे हैं। करोड़ों रुपये एक फिल्म में काम करने के लेते हैं। भोले युवक विवेक खोकर उनके फैन बन जाते हैं। वे अपना धंधा चला रहे हैं, आप मूर्ख बनकर सिनेमा देखने में धन व्यर्थ करते हैं। जिस हीरोइन के लिए आप पागल होते हैं, आप उनके घर जाकर देखें, वे आपको पानी भी नहीं पिलाएँगे। चार-पाँच दूर खड़ी होंगी। विचार करें कि मैं लड़डू खा रहा हूँ और आप देख रहे हो। आप कह रहे हो कि वाह! लड़डू बड़े स्टाइल से खा रहा है। आपको क्या मिला? यही दशा फिल्मी एक्टर्स तथा दर्शकों की है। ❖ हमने अपनी सोच बदलनी है :- ➤ जैसे हम अश्लील मूर्तियाँ देखते हैं तो अश्लीलता उत्पन्न होती है क्योंकि उस उत्तेजक मूर्ति ने अंदर चिंगारी लगा दी, पेट्रोल सुलगने लगा। ऐसी तस्वीरों को तिलांजलि दे दें। ➤ जैसे हम देशभक्तों की जीवनी पढ़ते हैं और मूर्ति देखते हैं तो हमारे अंदर देशभक्ति की प्रेरणा होती है। ऐसी तस्वीर घर में हों तो कोई हानि नहीं। ➤ यदि हम साधु-संत-फकीरों तथा अच्छे चरित्रवान नागरिकों की जीवनी पढ़ते सुनते हैं तो सर्व दोष शांत होकर हम अच्छे नागरिक बनने का विचार करते हैं। संत तथा सत्संग की अति आवश्यकता है जहाँ अच्छे विचार बताए जाते हैं। ➤ हम अपनी छोटी-सी बेटी को स्नान कराते हैं, वस्त्र पहनाते हैं। इस प्रकार घर पर बहू बनकर आती है। अब न्याय करो कि यह शुद्ध विचार से विचारने की बात है। इस प्रकार विवेक करने से खानाबदोश विचार नष्ट हो जाते हैं। साधु भाव उत्पन्न हो जाते हैं। ➤ समाचार पत्रों में भी इतनी अश्लील तस्वीरें छपती हैं जो युवाओं को असामान्य कर देती हैं। कुछ कपड़ों की प्रसिद्धि में लड़कियाँ केवल अंडरवियर तथा ब्रा (ब्रैजियर) पहनती हैं जो गलत है। इसी प्रकार पुरुष भी अंडरवियर (कच्छे) की प्रसिद्धि के लिए केवल चड्डी पहनकर खड़े दिखाई देते हैं जो महानता का प्रतीक है। इनको बंद किया जाना चाहिए। इसके लिए सरकारों की आवश्यकता है जो संवैधानिक तरीके से इस प्रकार की अश्लीलता को बंद कराने के लिए संघर्ष करें तथा मानव को चरित्रवान, दयावान बनाने के लिए अच्छी पुस्तकें उपलब्ध कराएँ। सत्संग की व्यवस्था कराएँ। ➤ अच्छे विचार सुनने वाले बच्चे संयमी होते हैं। देखने में आता है कि जिस बेटी का पति विवाह के कुछ दिन पश्चात फौज अथवा नौकरी पर चला गया। लगभग आठ-नौ महीने छुट्टी पर नहीं आता। कुछ बेटियाँ तो अपने पति रोजगार के लिए विदेश चले जाते हैं और तीन वर्ष तक भी नहीं लौटते। वे बेटियाँ संयम से रहती हैं। किसी गैर-पुरुष को स्वप्न में भी नहीं देखती। ये उत्तम खानदान की बेटियाँ हैं। पुरुष भी इतने दिन संयम में रहता है। वे बच्चे अच्छे घर के हैं। असल खानदान के होते हैं। जो भटके होते हैं, वे तांक-झांक करते रहते हैं। सिर के बालों की नई स्टाइल से कटिंग करवाकर काले-पीले चश्मे लगाकर गली-गली में कुत्तों की तरह फिरते हैं। वे खानाबदोश होते हैं। वे किसी गलत हरकत को करके बसे-बसाए घर को उजाड़ देते हैं क्योंकि वे किसी की बहन-बेटी को ऊल-जलूल इशारे करेंगे जिससे झगड़ा होगा। लड़ाई का रूप न जाने कहाँ तक विशाल हो जाए। किसी की मृत्यु भी हो सकती है। उस एक भटके ने दो घरों का नाश कर दिया। इसलिए अपने बच्चों को बचपन से ही सत्संग के वचन सुनाकर विचारवान तथा चरित्रवान बनाना चाहिए। ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। Sant Rampal Ji Maharaj YOUTUBE चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं। https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry #✝चर्च #🕌मस्जिद 🤲 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गुरु महिमा😇
✝चर्च - 50[ से बदलेंगे विचार rdouci ಮಖ3s 16 ` Uuu` M मनुष्य के जीवन में चरित्र और संयम का बहुत बड़ा महत्व है। अच्छे विचार और सत्संग से मनुष्य का जीवन सही दिशा चलता है। स्त्री और पुरुष केवल शरीर ম के भेद हैं॰ जबकि आत्मा एक HHI बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज होती है। इसलिए मनुष्य को हर व्यक्ति सम्मान की दृष्टि से देखना चाहिए। को रसंगत का प्रभाव मनुष्य के व्यवहार और सोच पर पड़ता है। अच्छी रसंगति से अच्छे संस्कार और बुरी संगति से बुरे विचार उत्पन्न होते हैं l जीवन में विवेक और मर्यादा रखना बहुन आवश्यक है। अश्लीलता और गलत आदतें मनुष्य कौ पतन की और ले जाती हैं। इसलिए मनुष्य को चाहिए। सच्चे संत का सत्संग अवश्य सुनना 1 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Ji @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ 50[ से बदलेंगे विचार rdouci ಮಖ3s 16 ` Uuu` M मनुष्य के जीवन में चरित्र और संयम का बहुत बड़ा महत्व है। अच्छे विचार और सत्संग से मनुष्य का जीवन सही दिशा चलता है। स्त्री और पुरुष केवल शरीर ম के भेद हैं॰ जबकि आत्मा एक HHI बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज होती है। इसलिए मनुष्य को हर व्यक्ति सम्मान की दृष्टि से देखना चाहिए। को रसंगत का प्रभाव मनुष्य के व्यवहार और सोच पर पड़ता है। अच्छी रसंगति से अच्छे संस्कार और बुरी संगति से बुरे विचार उत्पन्न होते हैं l जीवन में विवेक और मर्यादा रखना बहुन आवश्यक है। अश्लीलता और गलत आदतें मनुष्य कौ पतन की और ले जाती हैं। इसलिए मनुष्य को चाहिए। सच्चे संत का सत्संग अवश्य सुनना 1 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Ji @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Ji MAHARAJ - ShareChat