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#शहीद दिवस #बलिदान दिवस #इतिहास स्मृति #🇮🇳 देशभक्ति
शहीद दिवस - भूले बिसरे शहीद #_इंदु  भूषण_ राय २९ अप्रैल १९१२ पुण्यतीथि अमर शहीद क्रांतिकारी सूर्य सेन के साथी अमर शहीद क्रांतिकारी इंदु भूषण राय के बलिदान दिवस पर दिल से सलाम, वीर बलिदानी   इंदू भूषण रॉय खुलना बंगाल के रहने वाले थे, अब यह शहर बांग्लादेश में आता है, में हुआ " उनका जन्म १८९० থা, उन्हें आजादी के आंदोलन की प्रमुख घटनाओं में से एक अलीपुर बम कांड के प्रमुख षडयंत्रकारी थे, ११ अप्रैल १९०८ को चंदन के मेयर पर उन्होंने बम फेंका था, तब मेयर अपनी पत्नी के साथ भोजन कर रहा था॰ 2 मई १९०८ को उन्हें मानिकतल्ला गार्डेन से गिरफ्तार कर लिया गया, उन्हें उनके चार साथियों समेत अलीपुर के मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, यहां उन्होंने अपना गर्व से अपना अपराध स्वीकार किया, इसके बाद उन्हें T5 ೫, १० साल की कठोर सजा सुनाई  इस सजा के तहत उन्हें कालापानी भेजा गया, दिसंबर १९०९ में अंदमान पहुंचे, जेल में आते ही उन्हें इतनी कठोर शारीरिक और मानसिक यातना दी गई कि वे २९ अप्रैल १९१२ को उन्होंने अपने प्राण खुद त्याग दिए, उन्होंने अपने शर्ट को फाड़कर रस्सी तैयार की और उसकी मदद से खंबे पर फांसी पर झूल गए, तब उनकी उम्र महज २२ साल थी, क्रांतिकारी इंदुभूषण रॉय भूले बिसरे शहीद #_इंदु  भूषण_ राय २९ अप्रैल १९१२ पुण्यतीथि अमर शहीद क्रांतिकारी सूर्य सेन के साथी अमर शहीद क्रांतिकारी इंदु भूषण राय के बलिदान दिवस पर दिल से सलाम, वीर बलिदानी   इंदू भूषण रॉय खुलना बंगाल के रहने वाले थे, अब यह शहर बांग्लादेश में आता है, में हुआ " उनका जन्म १८९० থা, उन्हें आजादी के आंदोलन की प्रमुख घटनाओं में से एक अलीपुर बम कांड के प्रमुख षडयंत्रकारी थे, ११ अप्रैल १९०८ को चंदन के मेयर पर उन्होंने बम फेंका था, तब मेयर अपनी पत्नी के साथ भोजन कर रहा था॰ 2 मई १९०८ को उन्हें मानिकतल्ला गार्डेन से गिरफ्तार कर लिया गया, उन्हें उनके चार साथियों समेत अलीपुर के मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, यहां उन्होंने अपना गर्व से अपना अपराध स्वीकार किया, इसके बाद उन्हें T5 ೫, १० साल की कठोर सजा सुनाई  इस सजा के तहत उन्हें कालापानी भेजा गया, दिसंबर १९०९ में अंदमान पहुंचे, जेल में आते ही उन्हें इतनी कठोर शारीरिक और मानसिक यातना दी गई कि वे २९ अप्रैल १९१२ को उन्होंने अपने प्राण खुद त्याग दिए, उन्होंने अपने शर्ट को फाड़कर रस्सी तैयार की और उसकी मदद से खंबे पर फांसी पर झूल गए, तब उनकी उम्र महज २२ साल थी, क्रांतिकारी इंदुभूषण रॉय - ShareChat