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#✍️ अनसुनी शायरी #✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ अनसुनी शायरी - खुद का वजुद भी जरूरी है जनाब के सहारे जिदगी नहीं गुजरती। द्ुसरों { 43on -Kalyug ki batein खुद का वजुद भी जरूरी है जनाब के सहारे जिदगी नहीं गुजरती। द्ुसरों { 43on -Kalyug ki batein - ShareChat