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गज़ल दाग देहलवी #✒ शायरी
✒ शायरी - "गज़ल ले चला जान मिरी रूठ के जाना तेरा ऐसे आने से तो बेहतर था न आना तेरा अपने दिल को भी बताऊँ न ठिकाना तेरा सब ने जाना जो पता एक ने जाना तेरा तू जो ऐ ज़ुल्फ़ परेशान रहा करती है किस के उजड़े हुए दिल में है ठिकाना तेरा आरज़ू ही न रही सुब्ह एन्वतन की मुझ को शाम ए- ग़ुर्बत है अजब वक़्त স্তুচানা নয ये समझ कर तुझे ऐ मौत लगा रक्खा है है बुरे वक़्त में आना तेरा কাম সানা ऐ दिल॰एन्शेफ़्ता में आग लगाने वाले रंग लाया है ये लाखे का जमाना तेरा तू ख़ुदा तो नहीं ऐ नासेह ए॰नादाँ मेरा क्या ख़ता की जो कहा मैं ने न माना तेरा रंज क्या वस्ल ए॰अदू का जो तअ ल्लुक़ ही नहीं मुझ को वल्लाह हँसाता है रुलाना तेरा ओ दैर में या चश्म ओ दिल ए॰आशिक़ में কূানা इन्हीं दो॰चार घरों में है ठिकाना तेरा तर्क-एनआदत से मुझे नींद नहीं आने की कहीं नीचा न हो ऐ गोर सिरहाना तेरा मैं जो कहता हूँ उठाए हैं बहुत रंज ए फ़िराक़ वो ये कहते हैं बड़ा दिल है तवाना तेरा बज़्म एन्दुश्मन से तुझे कौन उठा सकता है इक क़यामत का उठाना है उठाना तेरा अपनी आँखों में अभी कौंद गई बिजली सी हम न समझे कि ये आना है कि जाना तेरा यूँ तो क्या आएगा तू फ़र्त ए॰्नज़ाकत से यहाँ सख़्त दुश्वार है धोके में भी आना तेरा 'दाग़' को यूँ वो मिटाते हैं ये फ़रमाते हैं तू बदल डाल हुआ नाम पुराना तेरा (दाग देहलवी Motivational Videos Appl Want "गज़ल ले चला जान मिरी रूठ के जाना तेरा ऐसे आने से तो बेहतर था न आना तेरा अपने दिल को भी बताऊँ न ठिकाना तेरा सब ने जाना जो पता एक ने जाना तेरा तू जो ऐ ज़ुल्फ़ परेशान रहा करती है किस के उजड़े हुए दिल में है ठिकाना तेरा आरज़ू ही न रही सुब्ह एन्वतन की मुझ को शाम ए- ग़ुर्बत है अजब वक़्त স্তুচানা নয ये समझ कर तुझे ऐ मौत लगा रक्खा है है बुरे वक़्त में आना तेरा কাম সানা ऐ दिल॰एन्शेफ़्ता में आग लगाने वाले रंग लाया है ये लाखे का जमाना तेरा तू ख़ुदा तो नहीं ऐ नासेह ए॰नादाँ मेरा क्या ख़ता की जो कहा मैं ने न माना तेरा रंज क्या वस्ल ए॰अदू का जो तअ ल्लुक़ ही नहीं मुझ को वल्लाह हँसाता है रुलाना तेरा ओ दैर में या चश्म ओ दिल ए॰आशिक़ में কূানা इन्हीं दो॰चार घरों में है ठिकाना तेरा तर्क-एनआदत से मुझे नींद नहीं आने की कहीं नीचा न हो ऐ गोर सिरहाना तेरा मैं जो कहता हूँ उठाए हैं बहुत रंज ए फ़िराक़ वो ये कहते हैं बड़ा दिल है तवाना तेरा बज़्म एन्दुश्मन से तुझे कौन उठा सकता है इक क़यामत का उठाना है उठाना तेरा अपनी आँखों में अभी कौंद गई बिजली सी हम न समझे कि ये आना है कि जाना तेरा यूँ तो क्या आएगा तू फ़र्त ए॰्नज़ाकत से यहाँ सख़्त दुश्वार है धोके में भी आना तेरा 'दाग़' को यूँ वो मिटाते हैं ये फ़रमाते हैं तू बदल डाल हुआ नाम पुराना तेरा (दाग देहलवी Motivational Videos Appl Want - ShareChat