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शेर मिर्जा गालिब #✒ शायरी
✒ शायरी - ೦ ( भूल गया हो तो पता मुझे बतला दू कभी फ़ितराक में तेरे कोई नख़्चीर भी था भावार्थः है तू: মযা এনা থুল ऐसा लगता कर कभी तूने गया है। याद शिकार किया था और उसे अपने नख़्चीर (शिकार रखने झोला) में रखा था। मैं वही का शिकार हूं जिसे तूने शिकार किया था। यानी एक ज़माना रिश्ते बहुत अच्छे हमारे था जब और क़रीबी थे। मिर्जा गालिब (৫C৯)_ Motivational Videos App Want ೦ ( भूल गया हो तो पता मुझे बतला दू कभी फ़ितराक में तेरे कोई नख़्चीर भी था भावार्थः है तू: মযা এনা থুল ऐसा लगता कर कभी तूने गया है। याद शिकार किया था और उसे अपने नख़्चीर (शिकार रखने झोला) में रखा था। मैं वही का शिकार हूं जिसे तूने शिकार किया था। यानी एक ज़माना रिश्ते बहुत अच्छे हमारे था जब और क़रीबी थे। मिर्जा गालिब (৫C৯)_ Motivational Videos App Want - ShareChat