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प्यारी प्रीतम चरण-रज, दुर्लभ देहु मिलाय। धन्य धन्य वे रसिक जन, मन तन कुंजन आय ॥ - श्री भोरी सखी, प्रेम की पीर श्रीहित भोरीसखी जी कहती हैं कि ऐसी कृपा हो जाए कि अत्यन्त दुर्लभ श्रीहित लाड़िली-लाल के श्रीचरणों की रज में मैं भी रज बन कर मिल जाऊँ । #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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