#☝आज का ज्ञान
🪕 एक दासीपुत्र कैसे बना ब्रह्मांड का सबसे बड़ा 'देवर्षि'? 🪕
हम सब देवर्षि नारद को 'नारायण-नारायण' जपते हुए देखते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वे अपने पूर्वजन्म में एक साधारण दासीपुत्र थे?
श्रीमद्भागवत के अनुसार, नारद जी पिछले जन्म में एक निर्धन दासी के पुत्र थे। बचपन में ही संतों की सेवा और उनकी पत्तलों की जूठन (प्रसाद) खाने से उनका अंतःकरण शुद्ध हो गया।
मात्र 5 वर्ष की आयु में माता का देहांत हो गया। वे अनाथ हो गए, लेकिन उन्होंने इसे भगवान का संकेत माना और जंगल में तपस्या करने निकल पड़े।
वहां भगवान की एक झलक पाकर वे व्याकुल हो उठे। आकाशवाणी हुई— "हे बालक! इस जन्म में अब तुम्हें मेरे दर्शन नहीं होंगे। अगले कल्प में तुम मेरे पार्षद बनोगे।"
वही बालक अपनी कठोर तपस्या और भक्ति के बल पर ब्रह्मा जी के मानस पुत्र 'देवर्षि नारद' के रूप में अवतरित हुए। 🌟
आज वे अपनी वीणा की तान से दुखी संसार को आनंदित करते हैं। ध्रुव, प्रह्लाद और वाल्मीकि जैसे महान भक्तों के गुरु नारद जी ही हैं।
सीख: सत्संग और भक्ति से रंक भी 'देवर्षि' बन सकता है। 🙏
।। जय श्री हरि ।।


