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#देश भक्ति #🙏 माँ वैष्णो देवी #🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #माता वैष्णोदेवी
देश भक्ति - ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश  कर्मपोगी के नश्वर तन की एक पल की गारंठी नर्हीहै, तोभता कोईकर्मपोगी कर्मभूमि काावामीकैर वन सकता है? कल्कि साधक  কলারা সাঙল  33 धरती...एक धर्म...हम सबका स्वामी एक कल्कि ज्ञान सागर का संदेश  धरती हम सबका देश। मुढ़बुद्धि के लोग है, जो कर्मभूमि पर की सीमाएं बनाकर आपस में लड़ रहे हैं। अद्भुद रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ईश्वरीय ज्ञानानुसार सभी कर्मयोगियों का जन्म अतः सभी कर्मयोगी प्रकृति व परमात्मा के कर्मभूमि पर होता है, सिद्धांतानुसार कर्मभूमि पर पूर्ण स्वतंत्रता के साथ जहां भी मन चाहे निवास कर सकता है और पूरी कर्मभूमि पर बिना किसी रोक-्टोक के कुछ मुढ़ बुद्धि के लोगों ने कर्मभूमि पर fd भ्रमण भी कर सकता है, मानव जगत के लोगों की देश-विदेश की सीमाएं बनाकर, सम्पूर्ण अंकुश  लगा दिया हैं ज्ञात रहे मानव चाहे जितने ताकतवर स्वतंत्रता पर हथियार बना ले, वो प्रकृति और परमात्मा से नहीं लड़ सकता । नहीं प्रकृति की मार से अपने आपको बचा सकता है। विकसित व विकासशील देशों को हथियारों पर खर्च होने वाले पैसों को बचाकर कर्मभूमि पर विकास में मानव चाहे तो अंतरिक्ष में धरती जैसी अनेक दूनिया चाहिए লোনা दूनिया में भ्रमण करने का आनन्द ले सकता  বুনিমাম बसाकर एक दूसरी  है। ज्ञात रहे ईश्वर ने मानव को विज्ञान -विकास के लिए दिया है मानव मिट्टी में मिलाने के लिए नहीं ।सावधान प्रकृति और परमात्मा  सभ्यता को के खिलाफचले तो मिट्टी में मिल जाओगे ।कर्मभूमि पर प्रकृति की मार से बचना हैतो मानव ्मात्रको सत्कर्मी बनना होगा अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश  कर्मपोगी के नश्वर तन की एक पल की गारंठी नर्हीहै, तोभता कोईकर्मपोगी कर्मभूमि काावामीकैर वन सकता है? कल्कि साधक  কলারা সাঙল  33 धरती...एक धर्म...हम सबका स्वामी एक कल्कि ज्ञान सागर का संदेश  धरती हम सबका देश। मुढ़बुद्धि के लोग है, जो कर्मभूमि पर की सीमाएं बनाकर आपस में लड़ रहे हैं। अद्भुद रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ईश्वरीय ज्ञानानुसार सभी कर्मयोगियों का जन्म अतः सभी कर्मयोगी प्रकृति व परमात्मा के कर्मभूमि पर होता है, सिद्धांतानुसार कर्मभूमि पर पूर्ण स्वतंत्रता के साथ जहां भी मन चाहे निवास कर सकता है और पूरी कर्मभूमि पर बिना किसी रोक-्टोक के कुछ मुढ़ बुद्धि के लोगों ने कर्मभूमि पर fd भ्रमण भी कर सकता है, मानव जगत के लोगों की देश-विदेश की सीमाएं बनाकर, सम्पूर्ण अंकुश  लगा दिया हैं ज्ञात रहे मानव चाहे जितने ताकतवर स्वतंत्रता पर हथियार बना ले, वो प्रकृति और परमात्मा से नहीं लड़ सकता । नहीं प्रकृति की मार से अपने आपको बचा सकता है। विकसित व विकासशील देशों को हथियारों पर खर्च होने वाले पैसों को बचाकर कर्मभूमि पर विकास में मानव चाहे तो अंतरिक्ष में धरती जैसी अनेक दूनिया चाहिए লোনা दूनिया में भ्रमण करने का आनन्द ले सकता  বুনিমাম बसाकर एक दूसरी  है। ज्ञात रहे ईश्वर ने मानव को विज्ञान -विकास के लिए दिया है मानव मिट्टी में मिलाने के लिए नहीं ।सावधान प्रकृति और परमात्मा  सभ्यता को के खिलाफचले तो मिट्टी में मिल जाओगे ।कर्मभूमि पर प्रकृति की मार से बचना हैतो मानव ्मात्रको सत्कर्मी बनना होगा अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें - ShareChat