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#राधे कृष्ण
नित्त ध्यान धरूं चित्त से हित से,
उर गोविन्द के गुण गाया करूँ।
वृंदावन धाम में श्याम सखा,
मन ही मन में हरषाया करूँ।
नन्द यशोमती गुवालन को,
शिवदीन यूं भाग्य सराया करूँ।
श्री राधिका कृष्ण ही कृष्ण रटू,
ब्रज की रज शीश चढ़ाया करूँ।
संतन मीत से प्रीत करूँ,
उर में अति प्रेम जगाया करूँ।
ब्रज में यमुना तट जाकर के,
वहीँ घाट पे ठाठ से न्हाया करुं।
श्रीराधिका कृष्ण को नित्त है ये,
येहीं छंद सवैया सुनाया करूँ।
शिवदीन रटू नट नागर को,
ब्रज की रज शीश चढ़ाया करूं।
ब्रज बालन में वे गुवालन में,
बन कुंजन में नित जाया करूं।
गाय चरें जहें कानन में,
हरि के संग गाय चराया करूं।
पाकर मौका मैं राधिका को,
वह कृष्ण को हाल सुनाया करूं।
शिवदीन यकीन भयो उर में,
ब्रज की रज शीश चढ़ाया करूं।
नन्द यशोदा के आँगन में,
जहें खेलत कृष्ण मैं जाया करूं।
गुवाल सखा संग में मिल के,
कछु गान सुनो कछु गाया करूं।
माखन रोटी कन्हैया जी पावत,
जूँठ उठाय मैं पाया करूं।
शिवदीन करूं विनती सुनलो,
ब्रज की रज शीश चढ़ाया करूं।
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