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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - गजल शायरी सहर की सिर्फ़ दीवार-ओनदर नहीं होती| हर इमारत तो घर नहीं होती। | आज पर इख़्तियार है तेरा, कल की कोई ख़़बर नहीं होती| ज़िन्दगी है मान लिया, भमु मुख़्सतसरै नहनं हल्त्या इतनी सोचता हूँ गुज़र कहाँ. करता, जो तेरी रहगुज़र नहीं होती। न तुमुने किया यहाँ का फिर, रुख़ अब यहाँ पर 'सहर' नहीं होती| (इख़्तियार- अधिकार, मुख़्तसर- संक्षिप्त, रहगुज़र रास्ता, सहर- सवेरा , शायर का उपनाम) Aoo Want Motivational Videos गजल शायरी सहर की सिर्फ़ दीवार-ओनदर नहीं होती| हर इमारत तो घर नहीं होती। | आज पर इख़्तियार है तेरा, कल की कोई ख़़बर नहीं होती| ज़िन्दगी है मान लिया, भमु मुख़्सतसरै नहनं हल्त्या इतनी सोचता हूँ गुज़र कहाँ. करता, जो तेरी रहगुज़र नहीं होती। न तुमुने किया यहाँ का फिर, रुख़ अब यहाँ पर 'सहर' नहीं होती| (इख़्तियार- अधिकार, मुख़्तसर- संक्षिप्त, रहगुज़र रास्ता, सहर- सवेरा , शायर का उपनाम) Aoo Want Motivational Videos - ShareChat