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#🌞 Good Morning🌞 यह भी जाने
🌞 Good Morning🌞 - हिन्दुस्तान बीमानियामक बीमा झांसा देकर गलत तरीके से पॉलिसी बेचने पर सख्ती करेगा तैयारी : बीमा कंपनियां एजेंट के कमीशन पर लगाम लगाएंगी 2025 बदलावकीजरूरतक्यों नई दिल्ली, एजेंसी | बीमा नियामक  इरडा ने बोमा कंपनियों के के एजेट को पहले साल ही बहत ज्यादा  प्रमुखों  सामने गलत तरीके, झूठे वायदों के कमीशन मिल जाता ह। इसी कारण से में जीवनबीमा कंपनियों कई बार गलत पोलिसी बेच दी जाती हे आधारपरबीमा पालिसी बेचनेपरचचा के कमीशन भुगतान इससे बीमा कंपनियों का खर्च भी बढ की।सूत्रों के मुताबिक, उनकी बैठक में  ६० ८०० करोड़से जाता हे। कई पोलिसिया बीच में ही बंद जीवन बोमा   कंपनियों ने स्थगित अधिक रहना था।जबकि हो जाती ह। इरडा कमीशन को पॉलिसी कमीशन भुगतान माडल का सुझाव साधारण बीमा कंपनियों की उम्र से जोडना चाहता है ताकि एजेॅट दिया है।इसमें एजेंट को पूरा कमोशन जिम्मेदार बर्ने और ग्राहक को सस्ता, केमामलेमें यहआंकड़ा एक साथ नहीं, बल्कि पॉलिसी को पूरी टिकाऊ बीमा मिले  ४७,००० करोड़ है अवधि के दौरानदिया जाएगा | 677 4 सुझावों बताया जा रहा कमीशनपर सख्ती केसंभावित खतरे क्याहैस्थगित कमीशन कॉरपोरेट एजेंट्स के लिए पांच साल और व्यक्तिगत एजेंट्स के लिए तीन कमीशन भुगतान में यह अप्रत्याशित उछाल इस सेक्टर के लिए बडे  डिफर्ड कमीशन का मतलव ये हे कि बीमा एजेंट को पूरा कमीशन एक साथ नहीं मिलता, जोखिम पदा कर रहा है। कंपनियों का यह तर्क कि डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल साल का प्रस्ताव दिया गया हे। इसका  कमीशन पॉलिसी के साथ  के विकास के लिए उच्च कमीशन आवश्यक हे। कमीशन पर कडे और मकसद साफहै बीमा पालिसी केगलत মালী ৭ साथ किरतों मॅ दिया जाता ह। इससे एजेट पॉलिसी एकसमान सीमा लगाने से एजेसी - आधारित नेटवर्क ओर बेकएश्योरेॅस  बिक्री रोकना, कंपनियोंकाखर्चघटाना पार्टनरशिप जसे स्थापित डिस्ट्रीब्यूशन चनलों को गंभीर झटका लग  को चालू रखने ओर ग्राहक की सेवा करने मे और ग्राहकों को सस्ता. टिकाऊ चीमा ज्यादा रुचि लेता ह। पॉलिसी जितने लबे समय  सकता ह, जो बाजार तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण हॅ। इससे वितरकों देना | वैसे खास बात यह हैकि हालहो तक चलेगी . एजॅट को उतना ही कमीशन ओर बीमाकर्ताओं दोनों के लिए बिजनेस की मात्रा कम हो सकती ह, जो में भारतीय रिजर्व बैंक और आर्थिक मिलता रहेगा | शुरुआती सालो मे थोडा ज्यादा  बाजार को प्रभावित कर सकता ह। इसके अलावा  पारपरिक उत्पादों पर सर्वेक्षण मेंभी ऊंचे कमीशन पर सवाल ओर बाद के साला मे थोडा कम लेकिन ६० - ७०% तक पहुंचने वाले अग्रिम कमीशन , गलत बिक्री ओर उठाए गए थे। लगातार मिलता रहेगा | पौलिसीधारकों के मूल्य के कमी की चिंताएं बढा रहे हे। दरअसल , इरडा और बोमा कंपनियों  २०२५ में॰ जीवन बीमा कंपनियों के अगले कुछ महोनों में जारी किए जा बीमा  के प्रमुखों को यह मुलाकात चला गया। इन बढते के चलते ٩ ٩٢ कंपनियों के कमीशन भुगतान से जुड़े सकते हे कमीशन भुगतान ६०,८०० करोड़रुपये  कई कंपनियां अपने प्रबंधन खर्च को सोमा को पार कर चुको हैं । इस स्थिति बढ़ते खर्चों और नियामिकीय सीमाओं  पिछले एक दशक में पॉलिसी को से अधिक रहना था। जबकि साधारण  को लेकर हो हुई थी। बताया जा रहा है बीमा कंपनियों के मामले में यह भुगतान  को देखतेहुएबोमा नियामकनएनियमों  संख्या में ठहराव के बावजूद खर्चो में कि इस बैठक का आधार वित्त वर्ष आंकड़ा ४७ ००० करोड़ रुपये के पार लाने पर विचार कर रहा है।ये नियम लगभग 9 ४% सालानाकी वृद्धिहुईहै हिन्दुस्तान बीमानियामक बीमा झांसा देकर गलत तरीके से पॉलिसी बेचने पर सख्ती करेगा तैयारी : बीमा कंपनियां एजेंट के कमीशन पर लगाम लगाएंगी 2025 बदलावकीजरूरतक्यों नई दिल्ली, एजेंसी | बीमा नियामक  इरडा ने बोमा कंपनियों के के एजेट को पहले साल ही बहत ज्यादा  प्रमुखों  सामने गलत तरीके, झूठे वायदों के कमीशन मिल जाता ह। इसी कारण से में जीवनबीमा कंपनियों कई बार गलत पोलिसी बेच दी जाती हे आधारपरबीमा पालिसी बेचनेपरचचा के कमीशन भुगतान इससे बीमा कंपनियों का खर्च भी बढ की।सूत्रों के मुताबिक, उनकी बैठक में  ६० ८०० करोड़से जाता हे। कई पोलिसिया बीच में ही बंद जीवन बोमा   कंपनियों ने स्थगित अधिक रहना था।जबकि हो जाती ह। इरडा कमीशन को पॉलिसी कमीशन भुगतान माडल का सुझाव साधारण बीमा कंपनियों की उम्र से जोडना चाहता है ताकि एजेॅट दिया है।इसमें एजेंट को पूरा कमोशन जिम्मेदार बर्ने और ग्राहक को सस्ता, केमामलेमें यहआंकड़ा एक साथ नहीं, बल्कि पॉलिसी को पूरी टिकाऊ बीमा मिले  ४७,००० करोड़ है अवधि के दौरानदिया जाएगा | 677 4 सुझावों बताया जा रहा कमीशनपर सख्ती केसंभावित खतरे क्याहैस्थगित कमीशन कॉरपोरेट एजेंट्स के लिए पांच साल और व्यक्तिगत एजेंट्स के लिए तीन कमीशन भुगतान में यह अप्रत्याशित उछाल इस सेक्टर के लिए बडे  डिफर्ड कमीशन का मतलव ये हे कि बीमा एजेंट को पूरा कमीशन एक साथ नहीं मिलता, जोखिम पदा कर रहा है। कंपनियों का यह तर्क कि डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल साल का प्रस्ताव दिया गया हे। इसका  कमीशन पॉलिसी के साथ  के विकास के लिए उच्च कमीशन आवश्यक हे। कमीशन पर कडे और मकसद साफहै बीमा पालिसी केगलत মালী ৭ साथ किरतों मॅ दिया जाता ह। इससे एजेट पॉलिसी एकसमान सीमा लगाने से एजेसी - आधारित नेटवर्क ओर बेकएश्योरेॅस  बिक्री रोकना, कंपनियोंकाखर्चघटाना पार्टनरशिप जसे स्थापित डिस्ट्रीब्यूशन चनलों को गंभीर झटका लग  को चालू रखने ओर ग्राहक की सेवा करने मे और ग्राहकों को सस्ता. टिकाऊ चीमा ज्यादा रुचि लेता ह। पॉलिसी जितने लबे समय  सकता ह, जो बाजार तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण हॅ। इससे वितरकों देना | वैसे खास बात यह हैकि हालहो तक चलेगी . एजॅट को उतना ही कमीशन ओर बीमाकर्ताओं दोनों के लिए बिजनेस की मात्रा कम हो सकती ह, जो में भारतीय रिजर्व बैंक और आर्थिक मिलता रहेगा | शुरुआती सालो मे थोडा ज्यादा  बाजार को प्रभावित कर सकता ह। इसके अलावा  पारपरिक उत्पादों पर सर्वेक्षण मेंभी ऊंचे कमीशन पर सवाल ओर बाद के साला मे थोडा कम लेकिन ६० - ७०% तक पहुंचने वाले अग्रिम कमीशन , गलत बिक्री ओर उठाए गए थे। लगातार मिलता रहेगा | पौलिसीधारकों के मूल्य के कमी की चिंताएं बढा रहे हे। दरअसल , इरडा और बोमा कंपनियों  २०२५ में॰ जीवन बीमा कंपनियों के अगले कुछ महोनों में जारी किए जा बीमा  के प्रमुखों को यह मुलाकात चला गया। इन बढते के चलते ٩ ٩٢ कंपनियों के कमीशन भुगतान से जुड़े सकते हे कमीशन भुगतान ६०,८०० करोड़रुपये  कई कंपनियां अपने प्रबंधन खर्च को सोमा को पार कर चुको हैं । इस स्थिति बढ़ते खर्चों और नियामिकीय सीमाओं  पिछले एक दशक में पॉलिसी को से अधिक रहना था। जबकि साधारण  को लेकर हो हुई थी। बताया जा रहा है बीमा कंपनियों के मामले में यह भुगतान  को देखतेहुएबोमा नियामकनएनियमों  संख्या में ठहराव के बावजूद खर्चो में कि इस बैठक का आधार वित्त वर्ष आंकड़ा ४७ ००० करोड़ रुपये के पार लाने पर विचार कर रहा है।ये नियम लगभग 9 ४% सालानाकी वृद्धिहुईहै - 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