#मंगलवार #जय श्री हनुमान
कौन हैं वायु देवता जो हनुमान जी और भीम के पिता और गंधर्वों के राजा माने जाते हैं ?
वेदों में वायु देवता को बहुत सम्मानित देवता बताया गया है। वायु को जीवन माना गया है इसी कारण वो सभी देवताओं में सबसे अधिक प्रिय और महत्वपूर्ण माने गए। वायु देव से जुड़ी कई कहानियां प्रचलित हैं। आइए जानते हैं हनुमान जी,भीम और गंधर्वों से क्या है उनका नाता l
उत्तर-पश्चिम दिशा के संरक्षक वायु देव हैं। कई जगहों पर उनके बारे में जो वर्णन मिलता है उसमें उन्हें एक हिंसक देवता के रूप में भी दिखाया गया है जो कि विध्वंस करने में माहिर हैं। उन्हें जंगलों में रहने वाले दिव्य प्राणी गंधर्वों का राजा और सर्वोच्च शासक भी कहा जाता है। बलशाली भीम के पिता
वायु देवता पांचों पांडवों में से एक भीम के पिता हैं। भीम से उनके रिश्ते को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित है जिसके मुताबिक भीम की मां कुंती को किसी भी देवता से प्रसन्न होकर संतान पैदा करने का वरदान प्राप्त था। एक बार एक पुत्र के लिए कुंती ने भगवान वायु से प्रार्थना की। वायु देव ने उनकी इच्छा पूरी की और कुंती ने एक लड़के को जन्म दिया जो बेहद शक्तिशाली और मजबूत था और जिसका नाम था भीम। वह आगे चलकर पांडवों में सबसे शक्तिशाली बने।
हनुमान जी के पिता
ऐसा कहा जाता है कि वायु देवता हनुमान जी के आध्यात्मिक पिता हैं। इसीलिए हनुमान जी को पवनपुत्र कहा जाता है। वायु देवता का उग्र स्वरूप तब भी देखने को मिला था जब उनके पुत्र हनुमान पर बचपन में इंद्र देवता ने अपना शक्तिशाली वज्र चला दिया था और बाल हनुमान धरती पर मूर्छित होकर गिर पड़े थे। इसके बाद वायु देव ने पूरी दुनिया में हाहाकार मचा दिया था।
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वायु देवता का निवास स्थान
पौराणिक कथाओं के अनुसार गंधावती नाम की एक जगह है जिसे वायु देव का निवास स्थान माना जाता है। उनका हथियार ध्वज है और उनकी पत्नी का नाम भारती और स्वस्ति है। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने हिरण की चपलता और तेज़ी के कारण उसे अपनी सवारी के रूप में चुना, जो उनकी शक्तियों से मेल खाता है।
विशेष:: मानव शरीर जब तक जिवित रहता है जब तक उसमे प्राण है l प्राणों के निकल जाने के बाद शरीर अपनी सारी गतिविधियों को खो देता है l
शरीर के अंदर पांच प्रकार की वायु होती है जो शरीर का बल होता है l वे पांच वायु इस प्रकार हैं l प्राण, अपान, उदान , ब्यान एवं समान l भाग्यशाली वे लोग है जो अग्निहोत्री है यानि वातावरण को शुद्ध बनाये रखने के लिये प्राण वायु के उत्पादन के लिए पेड़ लगाते है और कोई एसा उद्योग नहीं लगाते है जिससे वायु प्रदूषित हो यानि वायु शुद्ध रहनी चाहिये l


