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#विश्वास करना चाहता हूँ
विश्वास करना चाहता हूँ - विश्वास करना चाहता हूँकि प्रेम में अपनी पराजय पर जब कविता के निपट एकांत में विलाप करता तो किसी वृक्ष पर नए उगे किसलयों में सिहरन होती बुरा लगता है किसी चिड़िया को दृश्य का फिसथी इतना हरा भराहाना किससक्षत्र की गति पल भरको धीमी पड़ती है अंतरिक्ष में कृथ्वीकी किसी अदृश्य शिरा में बह रहा लावा थोड़ा बुझता है केपार फैले पुरखे एक्टूसरे को ढाढ़स सदियों बंधाते टेवताओंके आंसू असमय हुई वर्षा में झूरते हैं मै रोता हूँ॰ तो पूरे ब्रह्माड्में झकृत होता है दुर्खका एकवृदवादन दुख मेंमुझे अंकेला न्रही छोड़ देता पचजय और संसार दुख घिरता है ऐसे जैसे बही अब देह हो जिसमे रहना और मरना है जैसे होने का वही असली रंग है जो अबजाकर उभरा है 9 विश्वास करना चाहता हूँकि प्रेम में अपनी पराजय पर जब कविता के निपट एकांत में विलाप करता तो किसी वृक्ष पर नए उगे किसलयों में सिहरन होती बुरा लगता है किसी चिड़िया को दृश्य का फिसथी इतना हरा भराहाना किससक्षत्र की गति पल भरको धीमी पड़ती है अंतरिक्ष में कृथ्वीकी किसी अदृश्य शिरा में बह रहा लावा थोड़ा बुझता है केपार फैले पुरखे एक्टूसरे को ढाढ़स सदियों बंधाते टेवताओंके आंसू असमय हुई वर्षा में झूरते हैं मै रोता हूँ॰ तो पूरे ब्रह्माड्में झकृत होता है दुर्खका एकवृदवादन दुख मेंमुझे अंकेला न्रही छोड़ देता पचजय और संसार दुख घिरता है ऐसे जैसे बही अब देह हो जिसमे रहना और मरना है जैसे होने का वही असली रंग है जो अबजाकर उभरा है 9 - ShareChat