ShareChat
click to see wallet page
search
#आज जिनकी पुण्यतिथि है #🇮🇳 देशभक्ति #🙏🏻माँ तुझे सलाम #🇮🇳 हम है हिंदुस्तानी
आज जिनकी पुण्यतिथि है - वर्ष १९२३ में जब क्रांतिकारियों ने विदेशियों की कम्पनी का असम, बंगाल रेलवे का ख़ज़ाना लूट सिंह लिया तो पुलिस को अनंता " క్డ पर संदेह हुआ। अब वे अन्य साथियों को लेकर गुप्त स्थान पर रहने लगे।  पुलिस ने चारों ओर से एक दिन जब उस स्थान को ননূল घेर लिया, तब अनंता सिंह के में क्रांतिकारी बलपूरवककँ सुलिस  एक पहाड़ी पर चढ़  तोड़कर का घेरा निकलने के बाद अनंता सिंह కి गए। वहाँ [("ಾಗ್ಕಾರ कोलकाता  कलकत्ता ) आ गए। लेकिन शीघ्र लिए ही गिरफ़्तार उन्हें 4 वर्ष के नज़रबंद कर दिया गया। Ananta Singh सजा अनंता लाल सिंह II अनंता सिंह १९२८ में जेल से छुटकर फिर चटगांव  दिसम्बर, १९०३l१]  जन्म पहुंचे और लोगों को संगठित किया।  बाद ही इसके जन्म भूमि चटगांव, बंगाल क्रांतिकारियों ने चटगांव के शस्त्रागार पर आक्रमण  २५ जनवरी, १९६९l१]  किया। अनंता सिंह फिर बचकर फ़्रैंच बस्ती चंद्रनगर সূন্ত্তু चले आए, किन्तु ज्यों ही उन्हें पता चला कि ' चटगांव  नागरिकता भारतीय कांड के लिए उनके युवा साथियों पर मुकदमा  ٤ चलाया जा रहा है, तब वे अपने साथियों के साथ  সমিন कांरिताकारी सूर्य सेन के नेतृत्व  विशेष खड़ा होने के लिए स्वंय पुलिस के सामने उपस्थित हो योगदान में ' चटगाँव आर्मरी रेड में भाग लिया। गए। उन सभी पर मुकदमा चलाया गया और कुछ अनंता सिंह को आजीवन कारावास के ~ अन्य साथियों के साथ उन्हें भी आजीवन कारावास जानकारी तहत १९३२ में अंडमान की जेल भेज की सज़ा देकर १ ९३२ में अंडमान की जेल भेज दिया दिया गया, जहाँ से वे १९४६ में रिहा हुए। T वर्ष १९२३ में जब क्रांतिकारियों ने विदेशियों की कम्पनी का असम, बंगाल रेलवे का ख़ज़ाना लूट सिंह लिया तो पुलिस को अनंता " క్డ पर संदेह हुआ। अब वे अन्य साथियों को लेकर गुप्त स्थान पर रहने लगे।  पुलिस ने चारों ओर से एक दिन जब उस स्थान को ননূল घेर लिया, तब अनंता सिंह के में क्रांतिकारी बलपूरवककँ सुलिस  एक पहाड़ी पर चढ़  तोड़कर का घेरा निकलने के बाद अनंता सिंह కి गए। वहाँ [("ಾಗ್ಕಾರ कोलकाता  कलकत्ता ) आ गए। लेकिन शीघ्र लिए ही गिरफ़्तार उन्हें 4 वर्ष के नज़रबंद कर दिया गया। Ananta Singh सजा अनंता लाल सिंह II अनंता सिंह १९२८ में जेल से छुटकर फिर चटगांव  दिसम्बर, १९०३l१]  जन्म पहुंचे और लोगों को संगठित किया।  बाद ही इसके जन्म भूमि चटगांव, बंगाल क्रांतिकारियों ने चटगांव के शस्त्रागार पर आक्रमण  २५ जनवरी, १९६९l१]  किया। अनंता सिंह फिर बचकर फ़्रैंच बस्ती चंद्रनगर সূন্ত্তু चले आए, किन्तु ज्यों ही उन्हें पता चला कि ' चटगांव  नागरिकता भारतीय कांड के लिए उनके युवा साथियों पर मुकदमा  ٤ चलाया जा रहा है, तब वे अपने साथियों के साथ  সমিন कांरिताकारी सूर्य सेन के नेतृत्व  विशेष खड़ा होने के लिए स्वंय पुलिस के सामने उपस्थित हो योगदान में ' चटगाँव आर्मरी रेड में भाग लिया। गए। उन सभी पर मुकदमा चलाया गया और कुछ अनंता सिंह को आजीवन कारावास के ~ अन्य साथियों के साथ उन्हें भी आजीवन कारावास जानकारी तहत १९३२ में अंडमान की जेल भेज की सज़ा देकर १ ९३२ में अंडमान की जेल भेज दिया दिया गया, जहाँ से वे १९४६ में रिहा हुए। T - ShareChat