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।। ॐ ।। यं लब्ध्वा चापरं लाभं मन्यते नाधिकं ततः। यस्मिन्स्थितो न दुःखेन गुरुणापि विचाल्यते।। #यथार्थ गीता #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 परमेश्वर की प्राप्तिरूपी जिस लाभ को, पराकाष्ठा की शान्ति को प्राप्त कर उससे अधिक दूसरा कुछ भी लाभ नहीं मानता और भगवत्प्राप्तिरूपी जिस अवस्था में स्थित हुआ योगी भारी दुःख से भी चलायमान नहीं होता, दुःख का उसे भान भी नहीं होता; क्योंकि भान करनेवाला चित्त तो मिट गया।
यथार्थ गीता - 113 11 यं लब्ध्वा चापरं लाभं मन्यते नाधिकं ततः | यस्मिन्स्थितो न दुःखेन गुरुणापि विचाल्यते।। परमेश्वर 7 की प्राप्तिरूपी जिस लाभ को, पराकाष्ठा की शान्ति को प्राप्त कर उससे अधिक दूसरा कुछ भी लाभ नहीं मानता और भगवत्प्राप्तिरूपी जिस अवस्था में भारी दुःख से भी स्थित हुआ योगी चलायमान नहीं होता , दुःख का उसे भान भी नहीं होता; क्योंकि भान करनेवाला चित्त तो मिट गया। पूज्य स्वामी श्री परमानन्द जी महाराज ( परमहंस जी ) षयथर्थ घीता " के प्रणेता स्वामी श्री अड़ुगडानन्द जी महाराज 113 11 यं लब्ध्वा चापरं लाभं मन्यते नाधिकं ततः | यस्मिन्स्थितो न दुःखेन गुरुणापि विचाल्यते।। परमेश्वर 7 की प्राप्तिरूपी जिस लाभ को, पराकाष्ठा की शान्ति को प्राप्त कर उससे अधिक दूसरा कुछ भी लाभ नहीं मानता और भगवत्प्राप्तिरूपी जिस अवस्था में भारी दुःख से भी स्थित हुआ योगी चलायमान नहीं होता , दुःख का उसे भान भी नहीं होता; क्योंकि भान करनेवाला चित्त तो मिट गया। पूज्य स्वामी श्री परमानन्द जी महाराज ( परमहंस जी ) षयथर्थ घीता " के प्रणेता स्वामी श्री अड़ुगडानन्द जी महाराज - ShareChat