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।। ॐ ।। दैवी ह्येषा गुणमयी मम मया दुरत्यया। मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते॥ यह त्रिगुणमयी मेरी अद्भुत माया दुस्तर है; किन्तु जो पुरुष मुझे ही निरन्तर भजते हैं, वे इस माया का पार पा जाते हैं। यह माया है तो दैवी, परन्तु अगरबत्ती जलाकर इसकी पूजा न करने लगें। इससे पार पाना है। #यथार्थ गीता #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕
यथार्थ गीता - // 35 || दैवी ह्येषा गुणमयी मम मया दुरत्यया।  मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते।। त्रिगुणमयी मेरी अद्भुत माया दुस्तर 46 है; किन्तु जो पुरुष मुझे ही निरन्तर भजते हैं, वे इस माया का पार पा जाते हैं। यह माया है तो दैवी , परन्तु अगरबत्ती जलाकर इसकी पूजा न करने लगें | इससे पार पाना है। Vutharth Sondesh @ पूज्य स्वामी श्री अड़गड़ारनदजी महाराज ७ शीपरमईसाआश्रमशक्तेशगठ्मिर्जापुर७ // 35 || दैवी ह्येषा गुणमयी मम मया दुरत्यया।  मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते।। त्रिगुणमयी मेरी अद्भुत माया दुस्तर 46 है; किन्तु जो पुरुष मुझे ही निरन्तर भजते हैं, वे इस माया का पार पा जाते हैं। यह माया है तो दैवी , परन्तु अगरबत्ती जलाकर इसकी पूजा न करने लगें | इससे पार पाना है। Vutharth Sondesh @ पूज्य स्वामी श्री अड़गड़ारनदजी महाराज ७ शीपरमईसाआश्रमशक्तेशगठ्मिर्जापुर७ - ShareChat