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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🙏 माँ वैष्णो देवी #🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। #देश भक्ति #माता वैष्णोदेवी
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश मानव जीवन कर्म प्रधान है जैसी करनी वैसी भरनी कर्मफल का अटल सिद्धांत ` ईश्वर न किसी को सुख देता है नहीं किसी को त्रासदी  कल्कि साधक  मानव स्वयं ही स्वयं का भाग्य विधाता है। फलाश माहन सम्पूर्ण सृष्टि में मानव ही एक ऐसा प्राणी है, जिसे सगुण परमात्मा परब्रह्म  की सर्वश्रेष्ठ कृति, सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी माना गया है। ८४ लाख लिए योनियों में एक मानव ही ऐसा प्राणी है, जिसे  भोजन के प्रकृति ने अनेक प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन व पीने के लिए अनेक प्रकार के तरल मानव ही एक ऐसा प्राणी है जो अपना मनपसंद भोजन दिए है पदार्थ अपने मन की इच्छाओं को अपनी जूबान से शब्दों को लिए, পান ক बोलकर व्यक्त कर सकता है। ज्ञात रहे प्रकृति ने मानव को शाकाहारी  बावजूद भी कर्मभूमि पर कई लोग अपनी जूबान  प्राणी बनाया है , इसके के स्वाद के प्रकृति के मासूम जीवों की हिंसा करके उनको अपना  लिए  प्रवृतियों के कारण ही धरती पर भोजन बनाते है मानव की तामसिक U बोझ बढ़ता है और पाप के कारण ही धरती पर बार-्बार पाप का प्राकृतिक आपदाएं आती है , महामारी फैलती है व महाविनाश होता है इस प्रकार मानव जगत के लोगों को उनके द्वारा किये गए तामसिक कर्मों की सजा मिलती हैं । सृष्टि के किसी भी छोटे से छोटे जीव को त्रासदी देना या किसी जीव की हिंसा करना महापाप हैं । पाप -कर्म करने वाले मानवको कर्मभूमि पर कभी सुख -शांति नहीं मिल सकती ।शाकाहारी , अहिंसावादी , सत्यवादी, सत्कर्मी, निष्काम कर्मयोगी बनों, अपना मानव जीवन सार्थकबनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश मानव जीवन कर्म प्रधान है जैसी करनी वैसी भरनी कर्मफल का अटल सिद्धांत ` ईश्वर न किसी को सुख देता है नहीं किसी को त्रासदी  कल्कि साधक  मानव स्वयं ही स्वयं का भाग्य विधाता है। फलाश माहन सम्पूर्ण सृष्टि में मानव ही एक ऐसा प्राणी है, जिसे सगुण परमात्मा परब्रह्म  की सर्वश्रेष्ठ कृति, सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी माना गया है। ८४ लाख लिए योनियों में एक मानव ही ऐसा प्राणी है, जिसे  भोजन के प्रकृति ने अनेक प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन व पीने के लिए अनेक प्रकार के तरल मानव ही एक ऐसा प्राणी है जो अपना मनपसंद भोजन दिए है पदार्थ अपने मन की इच्छाओं को अपनी जूबान से शब्दों को लिए, পান ক बोलकर व्यक्त कर सकता है। ज्ञात रहे प्रकृति ने मानव को शाकाहारी  बावजूद भी कर्मभूमि पर कई लोग अपनी जूबान  प्राणी बनाया है , इसके के स्वाद के प्रकृति के मासूम जीवों की हिंसा करके उनको अपना  लिए  प्रवृतियों के कारण ही धरती पर भोजन बनाते है मानव की तामसिक U बोझ बढ़ता है और पाप के कारण ही धरती पर बार-्बार पाप का प्राकृतिक आपदाएं आती है , महामारी फैलती है व महाविनाश होता है इस प्रकार मानव जगत के लोगों को उनके द्वारा किये गए तामसिक कर्मों की सजा मिलती हैं । सृष्टि के किसी भी छोटे से छोटे जीव को त्रासदी देना या किसी जीव की हिंसा करना महापाप हैं । पाप -कर्म करने वाले मानवको कर्मभूमि पर कभी सुख -शांति नहीं मिल सकती ।शाकाहारी , अहिंसावादी , सत्यवादी, सत्कर्मी, निष्काम कर्मयोगी बनों, अपना मानव जीवन सार्थकबनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें - ShareChat