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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - 3 सुनील अपने काम से प्रेम करिएतो कर्म बोझ नहीं लगेगा చేనే आजकल ट्रांसफरेबल स्किल्स का जमाना है। इसे सीधी भाषा में तो किसी एक काम में काम के कौशल को उतारना। दूसरे इंटरपर्सनल कम्युनिकेशन, समय प्रबंधन, डेटा विश्लेषण। एक ही काम पड़ेगा। यह प्रबंधन के ढंग हैं। अब इसी में अगर जोड़ना  में इन सबको अध्यात्म का सहारा लें तो ऋषि ्मुनियों ने शास्त्रों में एक स्किल और काकभुशुंडि जी ने बताई है, और वो है प्रेम। ये हर जगह काम आएगी। शुरू की तो तुलसीदास जी ने लिखा- जब गरुड़ जी को कथा सुनानी प्रथमहिं अति अनुराग भवानी, रामचरित सर कहेसि बखानी। भवानी, पहले तो उन्होंने बड़े ही प्रेम से रामचरितमानस सरोवर का रूपक समझाकर कहा और फिर आगे कथा बढ़ाई। यह बात शिव जी पार्वती को कह रहे हैं। कथा में बोलते समय उन्होंने प्रेम उतारा। वक्तव्य में ज्रेम हो तो मिठास, अपनापन, वाणी की गरिमा अपने आप आ जाती है।जो भी काम करें॰ प्रेम से करें और सबसे बड़ी बात तो यह है कि अपने काम से प्रेम करिए तो आपका कर्म आपको बोझ नहीं लगेगा।  Facebook:Pt. Vijayshankar Mchta 3 सुनील अपने काम से प्रेम करिएतो कर्म बोझ नहीं लगेगा చేనే आजकल ट्रांसफरेबल स्किल्स का जमाना है। इसे सीधी भाषा में तो किसी एक काम में काम के कौशल को उतारना। दूसरे इंटरपर्सनल कम्युनिकेशन, समय प्रबंधन, डेटा विश्लेषण। एक ही काम पड़ेगा। यह प्रबंधन के ढंग हैं। अब इसी में अगर जोड़ना  में इन सबको अध्यात्म का सहारा लें तो ऋषि ्मुनियों ने शास्त्रों में एक स्किल और काकभुशुंडि जी ने बताई है, और वो है प्रेम। ये हर जगह काम आएगी। शुरू की तो तुलसीदास जी ने लिखा- जब गरुड़ जी को कथा सुनानी प्रथमहिं अति अनुराग भवानी, रामचरित सर कहेसि बखानी। भवानी, पहले तो उन्होंने बड़े ही प्रेम से रामचरितमानस सरोवर का रूपक समझाकर कहा और फिर आगे कथा बढ़ाई। यह बात शिव जी पार्वती को कह रहे हैं। कथा में बोलते समय उन्होंने प्रेम उतारा। वक्तव्य में ज्रेम हो तो मिठास, अपनापन, वाणी की गरिमा अपने आप आ जाती है।जो भी काम करें॰ प्रेम से करें और सबसे बड़ी बात तो यह है कि अपने काम से प्रेम करिए तो आपका कर्म आपको बोझ नहीं लगेगा।  Facebook:Pt. Vijayshankar Mchta - ShareChat