ShareChat
click to see wallet page
search
गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा ববী বিহা বল-য-বথাা  गज़ल चौदहवीं   की যন   থী चर्चा   तिरा কলশ शब সয   ফ্কা ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा   तिरा कुछ हम   भी वहीं मौजूद थे हम से भी॰ सब पूछा किए हम   हँस  दिए हम  चुप   रहे   मंज़ूर तिरा 4f থা इस   शहर में किस से मिलें हम से तो छूटीं महफ़िलें থাতম   নযা   নাম   ল   ৪য  दीवाना r हर शख़्स कूचे   को  तेरे  छोड़   कर जोगी ही   बन जाएँ मगर तिरे   पर्बत तिरे নিমী Tt সল  तिरा सहरा Moiivational Vicleos Appl Want कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा ববী বিহা বল-য-বথাা  गज़ल चौदहवीं   की যন   থী चर्चा   तिरा কলশ शब সয   ফ্কা ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा   तिरा कुछ हम   भी वहीं मौजूद थे हम से भी॰ सब पूछा किए हम   हँस  दिए हम  चुप   रहे   मंज़ूर तिरा 4f থা इस   शहर में किस से मिलें हम से तो छूटीं महफ़िलें থাতম   নযা   নাম   ল   ৪য  दीवाना r हर शख़्स कूचे   को  तेरे  छोड़   कर जोगी ही   बन जाएँ मगर तिरे   पर्बत तिरे নিমী Tt সল  तिरा सहरा Moiivational Vicleos Appl Want - ShareChat