ShareChat
click to see wallet page
search
#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - Iqbal poetry अंधेरी कब्र को खुद ही रोशन कर इकबाल आज ज़िंदा रूह से कोई वफा नहीं करता , कल मिट्टी के ढेर पर कौन दुआ करेगा। R ೩ h e - H i d a y ೩ t Iqbal poetry अंधेरी कब्र को खुद ही रोशन कर इकबाल आज ज़िंदा रूह से कोई वफा नहीं करता , कल मिट्टी के ढेर पर कौन दुआ करेगा। R ೩ h e - H i d a y ೩ t - ShareChat