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#प्रेयर
प्रेयर - फ़रवरी ತಾಗ' २०२६ 94 मनन-चिंतन चालीसाकाल के पवित्र समय की शुरुआत कर रहे ٩ ٤٩ आज हैंl यह समय आत्मचिंतन और अपने जीवन को पुनः निर्मित करने का स्वर्णिम अवसर है। यद्यपि यह समय हमें पश्चाताप , प्रार्थना , उपवास , तपस्या और दान देने के लिए समर्पित करने भी इसे दुःख का समय नहीं माना जा का आह्वान करता है, फिर सकता। बल्कि , यह आशा का समय है, जो हमें ईश्वर की दया पर भरोसा रखने के लिए बुलाता है। योएल नबी हमारे ईश्वर के सच्चे स्वरूप का वर्णन करते हुए हर्में ईश्वर के पास लौटने का साहस प्रदान करते हैंः "अपने प्रभु ईश्वर के पास लौट आओ , क्योंकि वह करुणामय , दयालु , सहनशील और दयासागर है और सहज ही द्रवित हा 7 जाता है । " (योएल २:१३) हम जानते हैं कि हम कमजोर  प्रवृत्तियों मनुष्य हैं। बार-बार हम अपनी दुर्बलताओं और पापी किन्तु  के शिकार हा जाते हैं। ईश्वर का प्रेम और दया हमारे पापों से कहों अधिक शक्तिशाली है। फिर भी , उध्दार पाने के 8 लिए सच्चे पश्चाताप के साथ ईश्वर के पास लौट आना ही ೩ केवल एक मार्ग है, चाहे हमारे जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ , अशुद्धियाँ और अयोग्यता क्यों न हो। हमारे लिए క चालीसाकाल का क्या अर्थ है? क्या केवल प्रार्थना , उपवास और दान देना ही हमें ईश्वर की दया प्राप्त करने में सहायता कर सकते हैं? हमारा ईश्वर वह है जो हमारे अतंरतम को देखता और जानता है। प्रभु येसु आज के सुसमाचार में स्वयं को धर्मी की बुराई और पाखंड के प्रति हमें सावधान करते हैंl वे हमें सार्वजनिक रूप से दिखावे के लिए की गई प्रार्थना , उपवास  ؟؟ और दान देने की मानसिकता रहने की चेतावनी देते हैंl प्रभु हमें सिखाते हैं कि ईश्वर धार्मिकता के दिखावे से बाहरी अधिक हृदय की सच्चाई को पसंद करते हैं। ईश्वर उन लोगों पर दया करते हैं जो अपने पापों को सच्चे मन से स्वीकार करते हैं , भारी हृदय से पश्चाताप करते हैं और ईश्वर की दया के लिए उनके पास लौट आते हैंl आइए, हम आत्मनिरीक्षण करें ~ क्या हमारा धार्मिक जीवन और धार्मिक में प्रामाणिक है? क्या हम केवल बाहरी रूप से आचरण वास्तव धार्मिकता का प्रदर्शन करते हैं , या हमारे हृदय की गहराइयों में सच्ची धार्मिकता का निवास है? ईश्वर हमें इस पवित्र चालीसाकाल के माध्यम से हमारी अंतरात्मा को जाँचने की कृपा दें और हमें सच्चे हृदय से पश्चाताप करने के लिए सक्षम बनाएँ , जिससे हम उनकी दया और क्षमा को प्राप्त कर सकें | फ़रवरी ತಾಗ' २०२६ 94 मनन-चिंतन चालीसाकाल के पवित्र समय की शुरुआत कर रहे ٩ ٤٩ आज हैंl यह समय आत्मचिंतन और अपने जीवन को पुनः निर्मित करने का स्वर्णिम अवसर है। यद्यपि यह समय हमें पश्चाताप , प्रार्थना , उपवास , तपस्या और दान देने के लिए समर्पित करने भी इसे दुःख का समय नहीं माना जा का आह्वान करता है, फिर सकता। बल्कि , यह आशा का समय है, जो हमें ईश्वर की दया पर भरोसा रखने के लिए बुलाता है। योएल नबी हमारे ईश्वर के सच्चे स्वरूप का वर्णन करते हुए हर्में ईश्वर के पास लौटने का साहस प्रदान करते हैंः "अपने प्रभु ईश्वर के पास लौट आओ , क्योंकि वह करुणामय , दयालु , सहनशील और दयासागर है और सहज ही द्रवित हा 7 जाता है । " (योएल २:१३) हम जानते हैं कि हम कमजोर  प्रवृत्तियों मनुष्य हैं। बार-बार हम अपनी दुर्बलताओं और पापी किन्तु  के शिकार हा जाते हैं। ईश्वर का प्रेम और दया हमारे पापों से कहों अधिक शक्तिशाली है। फिर भी , उध्दार पाने के 8 लिए सच्चे पश्चाताप के साथ ईश्वर के पास लौट आना ही ೩ केवल एक मार्ग है, चाहे हमारे जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ , अशुद्धियाँ और अयोग्यता क्यों न हो। हमारे लिए క चालीसाकाल का क्या अर्थ है? क्या केवल प्रार्थना , उपवास और दान देना ही हमें ईश्वर की दया प्राप्त करने में सहायता कर सकते हैं? हमारा ईश्वर वह है जो हमारे अतंरतम को देखता और जानता है। प्रभु येसु आज के सुसमाचार में स्वयं को धर्मी की बुराई और पाखंड के प्रति हमें सावधान करते हैंl वे हमें सार्वजनिक रूप से दिखावे के लिए की गई प्रार्थना , उपवास  ؟؟ और दान देने की मानसिकता रहने की चेतावनी देते हैंl प्रभु हमें सिखाते हैं कि ईश्वर धार्मिकता के दिखावे से बाहरी अधिक हृदय की सच्चाई को पसंद करते हैं। ईश्वर उन लोगों पर दया करते हैं जो अपने पापों को सच्चे मन से स्वीकार करते हैं , भारी हृदय से पश्चाताप करते हैं और ईश्वर की दया के लिए उनके पास लौट आते हैंl आइए, हम आत्मनिरीक्षण करें ~ क्या हमारा धार्मिक जीवन और धार्मिक में प्रामाणिक है? क्या हम केवल बाहरी रूप से आचरण वास्तव धार्मिकता का प्रदर्शन करते हैं , या हमारे हृदय की गहराइयों में सच्ची धार्मिकता का निवास है? ईश्वर हमें इस पवित्र चालीसाकाल के माध्यम से हमारी अंतरात्मा को जाँचने की कृपा दें और हमें सच्चे हृदय से पश्चाताप करने के लिए सक्षम बनाएँ , जिससे हम उनकी दया और क्षमा को प्राप्त कर सकें | - ShareChat