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🔥 महाभारत प्रसंग: जब भीमसेन ने किया बकासुर का अंत! 🔥
लाक्षागृह से बचने के बाद, पांडव एकचक्रा नगरी में एक ब्राह्मण के घर भिक्षा मांगकर अज्ञातवास काट रहे थे। लेकिन उस नगरी पर एक काला साया था...
👹 बकासुर का आतंक:
नगर के बाहर बक नाम का एक क्रूर दैत्य रहता था। उसकी शर्त थी कि प्रतिदिन नगर से एक व्यक्ति उसके लिए भोजन लेकर जाएगा, और वह भोजन के साथ उस व्यक्ति को भी खा जाता था।
🙏 माता कुंती का त्याग:
एक दिन उस ब्राह्मण परिवार की बारी आई जहाँ पांडव रुके थे। घर में विलाप सुनकर माता कुंती ने कहा, "आपने हमें आश्रय दिया है, आपके संकट को दूर करना हमारा कर्तव्य है। आपकी जगह मेरा पुत्र जाएगा।" ब्राह्मणी के मना करने पर कुंती ने आश्वस्त किया कि उनका पुत्र बहुत शक्तिशाली है।
💪 भीम का पराक्रम:
भीमसेन गाड़ी भर भोजन लेकर राक्षस के पास पहुंचे। वहाँ पहुँचकर उन्होंने दैत्य को बुलाने के बजाय, आराम से उसका भोजन खाना शुरू कर दिया!
अपने भोजन को कोई और खाता देख बकासुर क्रोध से पागल हो गया और भीम पर टूट पड़ा। भीम ने पहले डकार ली और फिर बोले, "तूने बहुतों का रक्त चूसा है, आज तुझे फल मिलेगा।"
⚔️ महायुद्ध और अंत:
महाबली भीम ने उस विशाल दैत्य को उठाकर हवा में घुमाया और वेग से जमीन पर पटक दिया। धरती पर गिरते ही बकासुर के प्राण पखेरू उड़ गए। भीम ने उसकी लाश को नगर द्वार पर लटका दिया।
सुबह जब नगरवासियों ने यह दृश्य देखा, तो एकचक्रा नगरी में आनंद की लहर दौड़ गई।
जय महाबली भीमसेन! 🙏


