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#✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #💔दर्द भरी कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍प्रेमचंद की कहानियां
✍मेरे पसंदीदा लेखक - जी हारल बा, बाकिर चल रहल बानी, धीरे - धीरे खुद के बदल रहल बानी। हँसे के आदत जबसे पड़ गइल हमके, ম কল  अपने लोगन के आँख रहल बानी। धोखा मिलल बा एतना जिनगी के राह में , फूँक-फूँक के अब हर डेग चल रहल बानी। कबहूँ हमरा घर से ना गइल अन्हरिया, बरिसन से दीया नियन जल रहल बानी। केहू आई कामे? अब ई आस छोड़ के, ओह पुरानका सोच से निकल रहल बानी। भीतर से टूटल बानी " नूरैन" हम जरूर, बस हिम्मत के दम पे उछल रहल बानी। जी हारल बा, बाकिर चल रहल बानी, धीरे - धीरे खुद के बदल रहल बानी। हँसे के आदत जबसे पड़ गइल हमके, ম কল  अपने लोगन के आँख रहल बानी। धोखा मिलल बा एतना जिनगी के राह में , फूँक-फूँक के अब हर डेग चल रहल बानी। कबहूँ हमरा घर से ना गइल अन्हरिया, बरिसन से दीया नियन जल रहल बानी। केहू आई कामे? अब ई आस छोड़ के, ओह पुरानका सोच से निकल रहल बानी। भीतर से टूटल बानी " नूरैन" हम जरूर, बस हिम्मत के दम पे उछल रहल बानी। - ShareChat