More like this
- Jaswant Dassदयानंद सरस्वती आत्मकथा, पेज 17; महर्षि दयानंद समग्र क्रांति के अग्रदूत, पेज 21 एवं महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र, पेज 50 में उल्लेख है कि दयानंद जी चावल त्यागकर इतना अधिक भांग पी लिया करते थे कि बेसुध हो जाते थे। महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र, सत्यार्थ प्रकाश पुस्तक पेज 494 पर दयानंद जी, शिवगुलाम प्रसाद को महर्षि दयानंद ध्यान लगाने के लिए दो तोला भांग पीने का परामर्श दे रहे हैं। सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 7, पृष्ठ 149 पर दयानंद जी परमात्मा को 'निराकार' कहते हैं जबकि स्वयं वेद साक्षी हैं— ऋग्वेद मण्डल 9, सूक्त 82, मंत्र 1: परमात्मा राजा के समान दर्शनीय है। सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 7, पृष्ठ 149 पर दयानंद जी परमात्मा को 'निराकार' कहते हैं जबकि यजुर्वेद अध्याय 7 मंत्र 39: “महान् इन्द्र: नृवत्” अर्थात ऐश्वर्यवान परमात्मा मनुष्यों के तुल्य है। #वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद #FactfulDebatesYouTubeChannel #SaNewsChannel #DayanandSaraswati #AryaSamaj #SatyarthPrakash #SanatanDharma #FbReels #Viralpost #Trendingpost #Viral #Trending #FbPost #SantRampalJiMaharaj ⤵️ https://youtu.be/lL77hV-M4sI #कबीर125
- Vishal das#TrueWorship_EndsSuffering Sa True Story YtChannel #kabir sahib ji12161
- Vishal das#TrueWorship_EndsSuffering Sa True Story YtChannel #kabir sahib ji1018
- Jaswant Dass#गैरां_के_दुख_दूर_करूं_या_ताकत_सै_मेरे_मैं #laxmibhandar #AnnapurnaYojana #westbengal #trendingnow #facebookpost #trendingpost #AnnapurnaMuhim #AnnapurnaMuhimYouTubeChannel #AnnapurnaMuhim_SantRampalJi #SantRampalJiMaharaj #SatlokAshram मंगलाज, शाजापुर (मध्य प्रदेश) के 70 वर्षीय बुज़ुर्ग जगन्नाथ जी और उनके बेटे की अन्नपूर्णा मुहीम के तहत लगातार तीसरी बार मदद की संत रामपाल जी महाराज जी ने। अन्नपूर्णा मुहिम का सहारा परिवार को राशन और अन्य आवश्यक सामग्रियां पहुँचाई गयी। आमला (बैतुल, म.प्र.): पति के निधन के बाद 4 बच्चों के पालन-पोषण में जूझ रही सोनू चौकीकर को मिला अन्नपूर्णा मुहिम का सहारा परिवार को राशन और अन्य आवश्यक सामग्रियां पहुँचाई गयी। #कबीर111
- Vishal das#krishna #mahadev #sanatandharma #shiva #SantRampalJiMaharaj #kabir sahib ji1714
- Vishal das#krishna #mahadev #sanatandharma #shiva #SantRampalJiMaharaj #kabir sahib ji1212
- Vishal das#krishna #mahadev #sanatandharma #shiva #SantRampalJiMaharaj #kabir sahib ji1419
- Jaswant Dass#GodMorningSunday #शराब_पीना_महापाप . #शब्द ऐसा कोई ना मिला, समुझै सैन सुजान.......। ढोल बाजता ना सुनै, सुरति-बिहूना कान....।। ऐसा कोई ना मिला, हम को देइ पहिचान.....। अपना करि किरपा करै, ले उतार मैदान......।। हम देखत जग जात है, जग देखत हम जाहिं। ऐसा कोई ना मिला, पकरि छुड़ावै बाहिं......।। प्रेमी ढूँढत मैं फिरौं, प्रेमी मिले न कोय.........। प्रेमी से प्रेमी मिले, विष से अमृत होय.........।। सिश तो ऐसा चाहिये, गुरु को सब कुछ देय...। गुरु तो ऐसा चाहिये, सिश से कछु न लेय.....।। हेरत हेरत हेरिया, रहा कबीर हिराय.............। बुंद समानी समुंद में, सो कित हेरी जाय.......।। हेरत हेरत हे सखी, रहा कबीर हिराय.........। समुंद समाना बुंद में, सो कित हेरा जाय.....।। Sa True Story YouTube #कबीर1716
- Jaswant Dass#GodNightWednesday #किसानमजदूरबचेगा_तभी_देशबचेगा . बाखबर/ तत्त्वदर्शी संत कुरान शरीफ के ज्ञान का दाता एक बाखबर/ इल्मवाला/ तत्त्वदर्शी संत से पूर्ण परमेश्वर/अल्लाह की जानकारी पूछने का विकल्प छोड़ देता है। वह सर्वोच्च ईश्वर की जानकारी नहीं रखता है। वह किसी 'बाखबर' अर्थात 'तत्त्वदर्शी संत' से अल्लाह की जानकारी प्राप्त करने का निर्देश दे रहा है। कुरान शरीफ- सूरत अल फुरकान 25:59 कबीर प्रभु वही है जिसने जमीन तथा आसमान के बीच में जो भी विद्यमान है सर्व सृष्टी की रचना छः दिन में की तथा सातवें दिन अपने सत्यलोक(अविनाशी लोक) के सिंहासन पर विराजमान हो(बैठ) गया। उसके बारे में किसी बाख़बर से पूछो। बाख़बर अल्लाह से परिचित महात्मा हैं जिन्हें सभी पवित्र ग्रंथों का पूरा ज्ञान है। उन्हें तत्त्वदर्शी संत/धीरानाम कहा जाता है। वह इस सृष्टि की रचना का जानने वाला है, इसका मतलब है कि वह इस ब्रह्मांड के निर्माण के बारे में पूरी तरह से जानता है। अल्लाहु अकबर की सच्ची परिभाषा और अर्थ क्या है? अल्लाहु अकबर' का अर्थ है 'ईश्वर सबसे महत्वपूर्ण है या अल्लाह/ईश्वर सबसे महान है’। यह इस्लाम में एक प्रचलित उद्गार है। इसका उपयोग किसी भी स्थिति में अल्लाह के ऊपर विश्वास की घोषणा के तौर पर किया जाता है। आगे अदान/अजान के कुछ भाग दिए गए है। इसमें 'अल्ला' का अर्थ है सबका मालिक/सर्वशक्तिमान। "अल्लाहु अकबर, आशादू अल्ला इलाहा इल्लल्लाह" भावार्थ: भगवान की शान सभी से अधिक होती है, मैं इस बात का गवाह हूं कि उस अल्लाह के सिवा कोई भगवान नहीं है। अज़ान/अदान (पूजा करने का आह्वान) एक प्रार्थना समारोह है जो इस्लाम में काफी प्रचलित है। इसमें 'अल्लाहु अकबर' से बार-बार एक छोटी प्रार्थना छंद के जरिये फरियाद जाता है। सूक्ष्मवेद में इस तरह की पूजा के बारे में उल्लेख है। उल्ट मोहम्मद महल पठाया, गुज़ बिरज एक कलमा ले आया। रोज़ा बंग नमाज़ दई रे, बिस्मिल की नहीं बात कही रे।।" पूर्ण परमात्मा कबीर ने बताया है, कि मैं मोहम्मद को वहाँ शाश्वत स्थान (सतलोक) में लेकर गया और जब हज़रत मोहम्मद जी वापस आए, तो उन्होंने तीन बातें बताईं- रोजा रखना, बंग देना और नमाज करना। पर उन्होंने बिस्मिल की बात बिल्कुल भी नहीं कही। इस्लाम में अल्लाह का क्या अर्थ है? अल्लाह शब्द इस्लाम में सर्वोच्च/सर्वशक्तिमान ईश्वर का पर्याय है जो दुनिया का निर्माता, नियंत्रक और संयोजक है। क़ुरान शरीफ़- सूरत फुरकान 25, आयत-52 इस बात का प्रमाण देता है कि अल्लाह ही वह 'एक' ईश्वर है। “फला-तूतिईल-काफिरिन-व-जाहिदुम-बिहि-जिहादन-कबीरन” यहां स्पष्ट रूप से 'कबीरन' शब्द वर्णित है। हम इसे 'कबीर/ कबीरा/ कबीरन/ खबीरा/ खबीरन' कह सकते हैं। इस आयत से यह स्पष्ट है कि ब्रह्मांड का निर्माता, सर्वशक्तिमान अल्लाह कबीर है। इस्लाम में अल्लाहु अकबर या भगवान कौन है? सातवीं शताब्दी ईसवी में अरब में पैगंबर मुहम्मद द्वारा फैलाया गया इस्लाम, अल्लाह को एकमात्र ईश्वर के रूप में देखता है और वे मानते हैं कि वह दुनिया का निर्माता, नियंत्रक और संयोजक है। वे कुरान शरीफ/मज़ीद को सबसे पवित्र ग्रंथ मानते हैं जो अल्लाह ने अपने पैगंबर मुहम्मद को दिया था। इस्लाम में पैगम्बर की प्रथा को समझने के लिए आदम, नूह, अब्राहम, मूसा और सुलेमान का उल्लेख करना अनिवार्य है। हज़रत मुहम्मद इस श्रृंखला में अंतिम स्थान पर आते हैं। Farmers Savior SantRampalJi #कबीर77
- Jaswant Dass#GodNightSaturday #महर्षिदयानंदसरस्वती_कीसच्चाई . परमात्मा का तत्त्वज्ञान तुरा न तीखा कूदना पुरूष नहीं रणधीर। नहीं पदमनी नगर में या मोटी तकसीर।। कबीर जी ने बताया है कि हे गरीबदास! जिस नगर व देश में तुरा अथार्त घोड़ा तेज दौड़ने व ऊँचा कूदने वाला नहीं है, और नागरिक रणधीर अथार्त शूरवीर नहीं हैं और जिस देश व नगर में पद्मनी यानि पतिव्रता स्त्री नहीं है तो यह मोटी तकसीर अथार्त बहुत बड़ी गलती है यानि कमी है। इस प्रकार का चरित्रावान स्त्री-पुरूष दोनों का होना अनिवार्य है। विवाह के पश्चात् ससुराल में कुछ लड़कियाँ सर्व श्रृंगार करती हैं। सज-धजकर गलियों से गुजरती हैं। अजीबो गरीब हरकत करती हैं। असहज लगने वाले भड़कीले चमकीले वस्त्र पहनकर बाजार या खेतों में या पानी लेने नल या कूँऐ पर जाती हैं। उनका उद्देश्य क्या होता है? स्पष्ट है कि अपने पति के अतिरिक्त अन्य पुरूषों को अपनी ओर आकर्षित करना। अपनी सुंदरता तथा वैभव का प्रदर्शन करना जो एक अच्छी बहू बेटी के लक्षण नहीं हैं। यदि कहें कि पति को प्रसन्न करने के लिए ऐसा करती हैं तो वे घर तक ही सीमित रहती तो अच्छा होता, परंतु ऐसे लक्षण मन में दोष के प्रतीक होते हैं। साधारण वस्त्र पहनने चाहिए, चाहे मंहगे हों, चाहे सस्ते। बहन-बेटी-बहू की नजर सामने 12 फुट तक रहनी चाहिए। चलते-बैठते, उठते समय ध्यान रखे कि कोई ऐसी गतिविधि न हो जाए जो किसी के लिए उत् प्रेरक हो। जैसे बहन-बेटी, बहू यानि युवती अपने परिजनों के साथ रहती है। ऐसा ही आचरण घर से बाहर होना चाहिए। उसकी प्रशंसा सभ्य समाज किया करता है। अन्य युवाओं को उसका उदाहरण बताते हैं। यदि पैट्रोल को चिंगारी नहीं मिलेगी तो वह विस्फोटक नहीं होता। Visit Sa News Channel #कबीर1219