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"सोहर छंद" ●●●●●●● 🌹🌱🌾 कहीं मुस्कुराओ तुम अपने, सोहर के छंदों पे.... और फिर रूठकर ही, कोई महकता गुलाब कह दो! न उलझाओ तुम भी अपने, सावन को इस माघ में.. दो शब्द कहो और फिर, कहकर दसबार कह दो! कर लो बंद आँखे अपने, यादों के पर्दों से... आँखों मे डूबकर ही, यूँ दो को चार कह दो! क्या फिक्र है तुम्हे भी, दिल ये समझ जाए... और कुछ नही तो बस, अपना ही हाल कह दो! बस छमककर कभी तुम, यूँ पायल सी होके... घुँघरुओं से थिरकते, दिल के यूँ चाल कह दो! मौशम के अंगराइयों पे मन, बस मचल ही बैठे.... कभी बरसकर बादलों सी, झमाझम कोई ताल कह दो! छेड़कर कोई इतराए और, यूँ शर्माओ जो तुम... लाल होकर ही यूँ, महकता हुआ साल कह दो! कहो प्यार है हमे पंछी से, फूलों से हर अपनों से... और इसी बहाने यूँ इश्क, हमें भी सौ दो सौ बार कह दो!!💕💞 .....✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒 🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #💝 शायराना इश्क़
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