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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - OTOL जब तक संवैधानिक संस्थाएं उन भाषाओं मेँ नहीं बोलेंगी , जिनमें नागरिक अपना जीवन जीते हैं॰ तब तक भाषाई लोकतंत्र एक अधूरा संवैधानिक वादा ही बना रहेगा। न्यायालयों के निर्णय आंज भी दिए  मुख्यतः अंग्रेजी में ही जाते हैं। OTOL जब तक संवैधानिक संस्थाएं उन भाषाओं मेँ नहीं बोलेंगी , जिनमें नागरिक अपना जीवन जीते हैं॰ तब तक भाषाई लोकतंत्र एक अधूरा संवैधानिक वादा ही बना रहेगा। न्यायालयों के निर्णय आंज भी दिए  मुख्यतः अंग्रेजी में ही जाते हैं। - ShareChat