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#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍️ अनसुनी शायरी #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #सोना की जिंदगी कुछ इस तरह
✍️ साहित्य एवं शायरी - चलो आज किसी और का नहीं खुद का ज़िक्र करती हूं आज मैं अपनी सारी खामियां कुबूल करती हूं माना मैं बहुत जिद्दी हूँ और सबसे लड़ती हूं पर किसे पता मैं अंदर से कितना टूटी हुई हूँ किसे पता मैं कितना अकेला महसूस करती हूं बेफिक्रर हूं पर अपने की बहुत फिकर करती हूं किसी पर तो क्या खुद पर भी यकीन अब नहीं कर पाती हूं॰ और क्या ही बताऊ अपने बारे में, अब दिन भर हंसते रहती हूं भी रो नहीं पाती. रोना বার্চু নী 0 चलो आज किसी और का नहीं खुद का ज़िक्र करती हूं आज मैं अपनी सारी खामियां कुबूल करती हूं माना मैं बहुत जिद्दी हूँ और सबसे लड़ती हूं पर किसे पता मैं अंदर से कितना टूटी हुई हूँ किसे पता मैं कितना अकेला महसूस करती हूं बेफिक्रर हूं पर अपने की बहुत फिकर करती हूं किसी पर तो क्या खुद पर भी यकीन अब नहीं कर पाती हूं॰ और क्या ही बताऊ अपने बारे में, अब दिन भर हंसते रहती हूं भी रो नहीं पाती. रोना বার্চু নী 0 - ShareChat