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#❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 ##भगवद गीता🙏🕉️ #🙏 प्रेरणादायक विचार
❤️जीवन की सीख - बलं बलवतां चाहं कामरागविवर्जितम्। धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोउस्मि भरतर्षभ ।। भरतश्रेष्ठ ! मैँ बलवानोंका आसक्ति और గ్ कामनाओंसे रहित बल अर्थात् सामर्थ्य हूँ और सब 31%7 धर्मके अनुकूल शास्त्रके अनुकूल भूतोंमें काम हूँ Il ११ II ये चैव सात्त्विका भावा राजसास्तामसाश्च ये। एवेति तान्विद्धि न त्वहं तेषु ते मयि।। 7 और भी जो सत्त्वगुणसे उत्पन्न होनेवाले भाव हैँ और जो रजोगुणसे तथा तमोगुणसे होनेवाले भाव हैँ, उन सबको तू ' मुझसे ही होनेवाले हैं ' ऐसा जान, परन्तु वास्तवमें * उनमें मैँ और वे मुझमें नहों हैँ II १२ II  त्रिभिर्गुणमयैर्भावैरेभिः মনসিন जगत्। मोहितं नाभिजानाति मामेभ्यः परमव्ययम् I। और कार्यरूप सात्त्विक, राजस गुणोंके IHH इन तीनों प्रकारके भावोंसे यह सारा संसार  प्राणिसमुदाय मोहित हो रहा है, इसीलिये इन तीनों परे मुझ अविनाशीको नहों जानता II १३ II गुणोंसे श्रीमदभगवदगीता अध्याय 7 प्रेस , गोरखपुर से साभार गीता बलं बलवतां चाहं कामरागविवर्जितम्। धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोउस्मि भरतर्षभ ।। भरतश्रेष्ठ ! मैँ बलवानोंका आसक्ति और గ్ कामनाओंसे रहित बल अर्थात् सामर्थ्य हूँ और सब 31%7 धर्मके अनुकूल शास्त्रके अनुकूल भूतोंमें काम हूँ Il ११ II ये चैव सात्त्विका भावा राजसास्तामसाश्च ये। एवेति तान्विद्धि न त्वहं तेषु ते मयि।। 7 और भी जो सत्त्वगुणसे उत्पन्न होनेवाले भाव हैँ और जो रजोगुणसे तथा तमोगुणसे होनेवाले भाव हैँ, उन सबको तू ' मुझसे ही होनेवाले हैं ' ऐसा जान, परन्तु वास्तवमें * उनमें मैँ और वे मुझमें नहों हैँ II १२ II  त्रिभिर्गुणमयैर्भावैरेभिः মনসিন जगत्। मोहितं नाभिजानाति मामेभ्यः परमव्ययम् I। और कार्यरूप सात्त्विक, राजस गुणोंके IHH इन तीनों प्रकारके भावोंसे यह सारा संसार  प्राणिसमुदाय मोहित हो रहा है, इसीलिये इन तीनों परे मुझ अविनाशीको नहों जानता II १३ II गुणोंसे श्रीमदभगवदगीता अध्याय 7 प्रेस , गोरखपुर से साभार गीता - ShareChat