ShareChat
click to see wallet page
search
#प्रेयर
प्रेयर - फ़ररी २०२५ 0 pusoutg क्चार मनन-चिंतन EVANGELIST हम खीस्तीयों के लिए उपवास हमेशा ईश्वर से जुड़ने के CORAD [ लिए एक व्यक्तिगत प्रयास माना जाता है। आज के सुसमाचार में , योहन के शिष्यों ने प्रभु येसु से पूछा कि उनके शिष्य उपवास क्यों नहीं करते , जबकि अन्य लोग उपवास रखते हैं उनका ध्यान केवल बाहरी उपवास जैसे भोजन और पेय से परहेज करना। अक्सर , அ் पर हमारा उपवास भी केचल गतिविधियोंतक बाहरी सीमित रह जञाता है जैसे कि स्वादिष्ट भोजन का त्याग , दूरी , दिनभर की मौन -साधन और भव्य उत्सवों से प्रार्थना , या परोपकार के कार्य। इन सभी गतिविधियों का हम पूरी निष्ठा से पालन करते हैं लेकिन हम अपने हृदय के उत्तम उपवास को भूल जाते हैंl प्रभु येसु ने उन्हें उत्तर दिया , "जब तक दूल्हा साथ है , क्या बाराती शोक सकते हैं?" (मत्ती ९:१५) येसु ने पश्चाताप का ;FI सुसमाचार प्रचार किया , जिसमें बाहरी तपस्या से कई अधिक आन्तरिक उपवास की आबश्यकता है। यदि कोई पूरे दिन बाहरी रूप से उपवास करता है, लेकिन ಕವ್ಾೆಶೆಗಾೆಗ್ೇಣೆ: अंदर से असंतुष्ट रहता है, करता है॰ शिकायत करता है, और बनाता है, तो जीवन मैें कृषा ला सकता है२ क्या ऐसा उपवास उसके योहन के शिष्य उपवास तो कर रहेथे, लेकिन वे दूसरों की आलोचना और शिकायत भो कर रहे थे , जो उनकी अंतरात्मा की अशुद्धि को दर्शाता है। प्रभु येसु के उत्तर ्में गहरा अर्थ छुपा है - जब किसी के हृदय में प्रभु येसु निवास करते हैं॰ तो बहाँ लोभ , ईर्ष्या , जलन , और द्वेष के लिए कोई स्थान नहों होता। तब उस हृदय को उपवास की आवश्यकता नहों पडती | लेकिन जब हम प्रभु से दूर चले जाते हैं, जब हम हमारे हृदय में प्रभु के लिए स्थान नहीं देते , तब हमारा हृदय सभी बुराइयों के शिकार बन जाता है , और तब उसे कठोर उपवास की होती है। आखिरकार , प्रभु हमसे जीवन आवश्यकता की अखंडता की अपेक्षा करते हैं। अखंडता का अर्थहै कि हमारा आंतरिक जोवन और बाहरी आचरण एक समान हो। आइए हम प्रभु को अपने जीबन की यात्रा में साथ चलने के लिए आमंत्रित करें , उन्हें अपने हृदय में स्थान दें और बह हमारे जीवन को रूपांतरित करेंगे । फ़ररी २०२५ 0 pusoutg क्चार मनन-चिंतन EVANGELIST हम खीस्तीयों के लिए उपवास हमेशा ईश्वर से जुड़ने के CORAD [ लिए एक व्यक्तिगत प्रयास माना जाता है। आज के सुसमाचार में , योहन के शिष्यों ने प्रभु येसु से पूछा कि उनके शिष्य उपवास क्यों नहीं करते , जबकि अन्य लोग उपवास रखते हैं उनका ध्यान केवल बाहरी उपवास जैसे भोजन और पेय से परहेज करना। अक्सर , அ் पर हमारा उपवास भी केचल गतिविधियोंतक बाहरी सीमित रह जञाता है जैसे कि स्वादिष्ट भोजन का त्याग , दूरी , दिनभर की मौन -साधन और भव्य उत्सवों से प्रार्थना , या परोपकार के कार्य। इन सभी गतिविधियों का हम पूरी निष्ठा से पालन करते हैं लेकिन हम अपने हृदय के उत्तम उपवास को भूल जाते हैंl प्रभु येसु ने उन्हें उत्तर दिया , "जब तक दूल्हा साथ है , क्या बाराती शोक सकते हैं?" (मत्ती ९:१५) येसु ने पश्चाताप का ;FI सुसमाचार प्रचार किया , जिसमें बाहरी तपस्या से कई अधिक आन्तरिक उपवास की आबश्यकता है। यदि कोई पूरे दिन बाहरी रूप से उपवास करता है, लेकिन ಕವ್ಾೆಶೆಗಾೆಗ್ೇಣೆ: अंदर से असंतुष्ट रहता है, करता है॰ शिकायत करता है, और बनाता है, तो जीवन मैें कृषा ला सकता है२ क्या ऐसा उपवास उसके योहन के शिष्य उपवास तो कर रहेथे, लेकिन वे दूसरों की आलोचना और शिकायत भो कर रहे थे , जो उनकी अंतरात्मा की अशुद्धि को दर्शाता है। प्रभु येसु के उत्तर ्में गहरा अर्थ छुपा है - जब किसी के हृदय में प्रभु येसु निवास करते हैं॰ तो बहाँ लोभ , ईर्ष्या , जलन , और द्वेष के लिए कोई स्थान नहों होता। तब उस हृदय को उपवास की आवश्यकता नहों पडती | लेकिन जब हम प्रभु से दूर चले जाते हैं, जब हम हमारे हृदय में प्रभु के लिए स्थान नहीं देते , तब हमारा हृदय सभी बुराइयों के शिकार बन जाता है , और तब उसे कठोर उपवास की होती है। आखिरकार , प्रभु हमसे जीवन आवश्यकता की अखंडता की अपेक्षा करते हैं। अखंडता का अर्थहै कि हमारा आंतरिक जोवन और बाहरी आचरण एक समान हो। आइए हम प्रभु को अपने जीबन की यात्रा में साथ चलने के लिए आमंत्रित करें , उन्हें अपने हृदय में स्थान दें और बह हमारे जीवन को रूपांतरित करेंगे । - ShareChat