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#🙋‍♂️السلام علیکم💐 #📝اسلام کا پیغام 🕌 #🕌عقیدت #🙏 عقیدت #عقیدہ بچانا ضروری ہے
🙋‍♂️السلام علیکم💐 - अल्लाह तआला ही मुख़्तार ए कुल है मुहम्मद सल्लाहो अलैहि वसल्लम अपना कोई इख़्तियार नहीं रखते! मुख्तार ए॰कुल के शाब्दिक अर्थ : पूर्ण अधिकार वाला, स्वतंत्र , सारी शक्तियां जिसके पास हों। ६.ऐ पैग़म्बर सल्लाहो अलैहि वसल्लम! आप के इख़्तियार में कुछ नहीं , अल्लाह तआला चाहे तो उन की तौबा क़ुबूल करे या अज़ाब दे, क्योंकि वह ज़ालिम हैं। सुरह आले इमरान (सुरह नंबर ३ आयत नंबर 128) ६.ऐ नबी सल्लाहो अलैहि वसल्लम! आप फरमा दीजिए कि मैं खुद अपनी ज़ात-ए॰ख़ास के लिए किसी नफ़े का इख़्तियार नहीं रखता और न किसी ज़रर (हानि) का, मगर उतना ही जितना अल्लाह तआला ने चाहा हो और अगर मैं ग़ैब (परोक्ष) तो मैं बहुत  की बातें जानता होता से मुनाफ़ा (लाभ) हासिल न पहुंचता मैं तो महज़ कर लेता और कोई नुक़सान 3ea5} डराने वाला और बशारत ( शुभसूचना) देने वाला हूं उन लोगों को जो ईमान रखते हैं। सुरह-अल आराफ़ (सुरह नंबर : ७ _ आयत नंबर 188) ६ी .और ईमानवालों के दिल एक॰दूसरे के साथ जोड़ दिए। तुम धरती की सारी दौलत भी ख़र्च कर डालते तो इन लोगों के दिल न जोड़ सकते थे, मगर वो अल्लाह है जिसने इन लोगों के दिल जोड़े , यक़ीनन वो बड़ा ज़बरदस्त और हिकमतवाला है। सुरह अल-आराफ़ (सुरह नंबर : ८_ आयत नंबर 63) अल्लाह तआला ही मुख़्तार ए कुल है मुहम्मद सल्लाहो अलैहि वसल्लम अपना कोई इख़्तियार नहीं रखते! मुख्तार ए॰कुल के शाब्दिक अर्थ : पूर्ण अधिकार वाला, स्वतंत्र , सारी शक्तियां जिसके पास हों। ६.ऐ पैग़म्बर सल्लाहो अलैहि वसल्लम! आप के इख़्तियार में कुछ नहीं , अल्लाह तआला चाहे तो उन की तौबा क़ुबूल करे या अज़ाब दे, क्योंकि वह ज़ालिम हैं। सुरह आले इमरान (सुरह नंबर ३ आयत नंबर 128) ६.ऐ नबी सल्लाहो अलैहि वसल्लम! आप फरमा दीजिए कि मैं खुद अपनी ज़ात-ए॰ख़ास के लिए किसी नफ़े का इख़्तियार नहीं रखता और न किसी ज़रर (हानि) का, मगर उतना ही जितना अल्लाह तआला ने चाहा हो और अगर मैं ग़ैब (परोक्ष) तो मैं बहुत  की बातें जानता होता से मुनाफ़ा (लाभ) हासिल न पहुंचता मैं तो महज़ कर लेता और कोई नुक़सान 3ea5} डराने वाला और बशारत ( शुभसूचना) देने वाला हूं उन लोगों को जो ईमान रखते हैं। सुरह-अल आराफ़ (सुरह नंबर : ७ _ आयत नंबर 188) ६ी .और ईमानवालों के दिल एक॰दूसरे के साथ जोड़ दिए। तुम धरती की सारी दौलत भी ख़र्च कर डालते तो इन लोगों के दिल न जोड़ सकते थे, मगर वो अल्लाह है जिसने इन लोगों के दिल जोड़े , यक़ीनन वो बड़ा ज़बरदस्त और हिकमतवाला है। सुरह अल-आराफ़ (सुरह नंबर : ८_ आयत नंबर 63) - ShareChat