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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - *आँखे* की तमाम *दुनिया मुसीबत* *সময লনী ৪ * *जब रोती है तो* दिलो को* * *हिला देती हैं * *और जब. * " *बंद* *होती है तो* *दुनिया* *को रुला देती हैं...!* *सुप्रभात* *आँखे* की तमाम *दुनिया मुसीबत* *সময লনী ৪ * *जब रोती है तो* दिलो को* * *हिला देती हैं * *और जब. * *बंद* *होती है तो* *दुनिया* *को रुला देती हैं...!* *सुप्रभात* - ShareChat