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#मेरे विचार #❤️जीवन की सीख #श्रीमद्भगवद् गीता #🙏गीता ज्ञान🛕 #📖जीवन का लक्ष्य🤔
मेरे विचार - विदुः सहस्रयुगपर्यन्तमहर्यद्ब्रह्मणो रात्रिं युगसहस्रान्तां तेउहोरात्रविदो जनाः II ब्रह्माका जो एक दिन है, उसको एक हजार चतुर्युगीतकको अवधिवाला और रात्रिको भी एक हजार चतुर्युगीतककी अवधिवाली जो पुरुष तत्त्वसे जानते हैँ, वे योगीजन कालके तत्त्वको जाननेवाले हैँ Il १७ Il अव्यक्ताद्व्यक्तयः सर्वाः प्रभवन्त्यहरागमे । रात्र्यागमे   प्रलीयन्ते तत्रैवाव्यक्तसञ्ज्के ।। सम्पूर्ण चराचर भूतगण ब्रह्माके दिनके प्रवेशकालमें अव्यक्तसे अर्थात् ब्रह्माके सूक्ष्म शरीरसे उत्पन्न होते हैँ और ब्रह्माकी रात्रिके प्रवेशकालमें उस अव्यक्त सूक्ष्मशरीरमें ही लीन हो जाते हैँ II १८ II नामक ब्रह्माके एवायं भूत्वा भूत्वा प्रलीयते। भूतग्रामः स रात्र्यागमेउवशः प्रभवत्यहरागमे II पार्थ ক   সাথ !  নঙ্কী ತನ೯ ೯- 46 भूतसमुदाय प्रकृतिके वशमें हुआ रात्रिके प्रवेशकालमें কান্য लीन होता है और दिनके प्रवेशकालमें  फिर ಹTTT ೯Il  Il 3(47 श्रीमदभगवदगीता अध्याय 8 W; गोरखपुर से साभार যীলা विदुः सहस्रयुगपर्यन्तमहर्यद्ब्रह्मणो रात्रिं युगसहस्रान्तां तेउहोरात्रविदो जनाः II ब्रह्माका जो एक दिन है, उसको एक हजार चतुर्युगीतकको अवधिवाला और रात्रिको भी एक हजार चतुर्युगीतककी अवधिवाली जो पुरुष तत्त्वसे जानते हैँ, वे योगीजन कालके तत्त्वको जाननेवाले हैँ Il १७ Il अव्यक्ताद्व्यक्तयः सर्वाः प्रभवन्त्यहरागमे । रात्र्यागमे   प्रलीयन्ते तत्रैवाव्यक्तसञ्ज्के ।। सम्पूर्ण चराचर भूतगण ब्रह्माके दिनके प्रवेशकालमें अव्यक्तसे अर्थात् ब्रह्माके सूक्ष्म शरीरसे उत्पन्न होते हैँ और ब्रह्माकी रात्रिके प्रवेशकालमें उस अव्यक्त सूक्ष्मशरीरमें ही लीन हो जाते हैँ II १८ II नामक ब्रह्माके एवायं भूत्वा भूत्वा प्रलीयते। भूतग्रामः स रात्र्यागमेउवशः प्रभवत्यहरागमे II पार्थ ক   সাথ !  নঙ্কী ತನ೯ ೯- 46 भूतसमुदाय प्रकृतिके वशमें हुआ रात्रिके प्रवेशकालमें কান্য लीन होता है और दिनके प्रवेशकालमें  फिर ಹTTT ೯Il  Il 3(47 श्रीमदभगवदगीता अध्याय 8 W; गोरखपुर से साभार যীলা - ShareChat