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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - अम्रिति भरपूरु है अंदरु चाखिओ सादु जापै।।   ERaei 4 fret3 g = 6R रसिध्रापैIl HoT अर्थः हमारे हृदय के भीतर ही वह आत्मिक अमृत परमात्मा लेकिन इसका स्वाद तब तक नाम का रस पूरी तरह भरा हुआ पता नहीं चलता, जब तक हम इसे चख' नहीं लेते। जिन्होंने उस आंतरिक अमृत का स्वाद ले लिया, वे निर्भय' हो गए। वे परमात्मा लगे के नाम रस से पूरी तरह तृप्त होँजाते हैं। बाहरी दुनिया की इच्छाएँ कभी खत्म नहीं होतीं, लेकिन 'हरि रस' चखने के बाद इंसान को किसी और चीज़ की लालसा नहीं रहती। वह मानसिक तेरा रूप से इतना अमीर हो जाता है कि उसे दुनिया के दबाव परेशान नहीं कर पाते। जब मनुष्य को भीतर के शाश्वत स्त्य का पता चल जाता है॰ तो उसे दुनिया का डर, वक्त की मार या मौत का खौफ नहीं रहता। वह जान जाता है कि उसका मूल कभी खत्म भाणा नहीं होने वाला। जिनको प्रभू ने मेहर करके यह रस पिलाया है उनको दोबारा मौत का डर सता नहीं सकता आत्मिक मौत उनके नजदीक नहीं आती है। अम्रिति भरपूरु है अंदरु चाखिओ सादु जापै।।   ERaei 4 fret3 g = 6R रसिध्रापैIl HoT अर्थः हमारे हृदय के भीतर ही वह आत्मिक अमृत परमात्मा लेकिन इसका स्वाद तब तक नाम का रस पूरी तरह भरा हुआ पता नहीं चलता, जब तक हम इसे चख' नहीं लेते। जिन्होंने उस आंतरिक अमृत का स्वाद ले लिया, वे निर्भय' हो गए। वे परमात्मा लगे के नाम रस से पूरी तरह तृप्त होँजाते हैं। बाहरी दुनिया की इच्छाएँ कभी खत्म नहीं होतीं, लेकिन 'हरि रस' चखने के बाद इंसान को किसी और चीज़ की लालसा नहीं रहती। वह मानसिक तेरा रूप से इतना अमीर हो जाता है कि उसे दुनिया के दबाव परेशान नहीं कर पाते। जब मनुष्य को भीतर के शाश्वत स्त्य का पता चल जाता है॰ तो उसे दुनिया का डर, वक्त की मार या मौत का खौफ नहीं रहता। वह जान जाता है कि उसका मूल कभी खत्म भाणा नहीं होने वाला। जिनको प्रभू ने मेहर करके यह रस पिलाया है उनको दोबारा मौत का डर सता नहीं सकता आत्मिक मौत उनके नजदीक नहीं आती है। - ShareChat