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शेर उदय प्रताप सिंह #✒ शायरी
✒ शायरी - 91 कश्ती को पार लेकर पुरानी ; फ़क़त हमारा हुनर गया है नये खेवैये कहीं ये ना समझें नदी का पानी उतर गया है उदय प्रताप सिंह @inyitie 91 कश्ती को पार लेकर पुरानी ; फ़क़त हमारा हुनर गया है नये खेवैये कहीं ये ना समझें नदी का पानी उतर गया है उदय प्रताप सिंह @inyitie - ShareChat