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#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - EeKTu Tu Hi Guru पुत्तर जब तक हम खुद को केवल शरीर समझते हैं, हम मौत से डरते हैं। जिस क्षण हम उस अमृत' को जो परमात्मा के नाम Ji संग उड़ने पर मिलता हैतो मौत एक बेमानी घटना बन जाती है मनुष्य के जब इंसान देख लेता है कि सारी लिए॰ चालाकियाँ , सारी उपलब्धियाँ और सारा शोर अंत में खालीपन ही देता है इस व्यर्थता' के बोध से ही वैराग्य जन्म लेता है उसके जीवन में. .!! उसकी भीतर मुड़ने की शुरुआत तब तक नहीं होती, जब तक उसकी बाहर की दौड़ पूरी तरह से शव्यर्थ जब संसार से मोह सिद्ध नही हो जाती॰ भंग होता है, तभी स्वयं से मनुष्य परिचय होना शुरू होता है वह जान लेता है मौत शरीर को छूती है, उस 'होने  को नहीं जो भीतर साक्षी भाव में बैठा है। जैसे ही बाहर की खिड़कियाँ बंद होती हैं, ऊर्जा वापस अपने केंद्र पर लौटने लगती है। इसी केंद्र पर वह ' अमृत' है जिसको पीके मनुष्य अपने जीवन को सफल कर लेता है..!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय! ! EeKTu Tu Hi Guru पुत्तर जब तक हम खुद को केवल शरीर समझते हैं, हम मौत से डरते हैं। जिस क्षण हम उस अमृत' को जो परमात्मा के नाम Ji संग उड़ने पर मिलता हैतो मौत एक बेमानी घटना बन जाती है मनुष्य के जब इंसान देख लेता है कि सारी लिए॰ चालाकियाँ , सारी उपलब्धियाँ और सारा शोर अंत में खालीपन ही देता है इस व्यर्थता' के बोध से ही वैराग्य जन्म लेता है उसके जीवन में. .!! उसकी भीतर मुड़ने की शुरुआत तब तक नहीं होती, जब तक उसकी बाहर की दौड़ पूरी तरह से शव्यर्थ जब संसार से मोह सिद्ध नही हो जाती॰ भंग होता है, तभी स्वयं से मनुष्य परिचय होना शुरू होता है वह जान लेता है मौत शरीर को छूती है, उस 'होने  को नहीं जो भीतर साक्षी भाव में बैठा है। जैसे ही बाहर की खिड़कियाँ बंद होती हैं, ऊर्जा वापस अपने केंद्र पर लौटने लगती है। इसी केंद्र पर वह ' अमृत' है जिसको पीके मनुष्य अपने जीवन को सफल कर लेता है..!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय! ! - ShareChat