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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - मुस्कुराओ तो कोई बात बने ज़ख़्म खाकर आँधियों में शमा जलाओ तो कोई बात बने. घुटघुट के ख़ुदकुशी करने से क्या फ़ायदा मेरे इश्क़ में डूब जाओतो कोई बात बने. बहुत हुआ अब नफ़रतों का ये नंगा नाच নী ব্ীৎ নান নন ख़ुशबूए इश्क़ लुटाओ मैंने माना ज़ख़्म देना फ़ितरत है तुम्हारी कभी मरहम लगाओ  तो कोई बात बने. पसे चिलमन तेरी जलवा अदाई बेमानी रूबरू मेरे बल खाओ तो कोई बात बने. कौसर. मुस्कुराओ तो कोई बात बने ज़ख़्म खाकर आँधियों में शमा जलाओ तो कोई बात बने. घुटघुट के ख़ुदकुशी करने से क्या फ़ायदा मेरे इश्क़ में डूब जाओतो कोई बात बने. बहुत हुआ अब नफ़रतों का ये नंगा नाच নী ব্ীৎ নান নন ख़ुशबूए इश्क़ लुटाओ मैंने माना ज़ख़्म देना फ़ितरत है तुम्हारी कभी मरहम लगाओ  तो कोई बात बने. पसे चिलमन तेरी जलवा अदाई बेमानी रूबरू मेरे बल खाओ तो कोई बात बने. कौसर. - ShareChat