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#श्री हरि #श्री हरि नारायण #श्री विष्णु हरि नारायण
श्री हरि - शान्ताकारं भुजग शयनं पद्मनाभं सुरेशम् विश्वाधारं गगन सदृशं मेघ वर्णं शुभाङ्गम् | लक्ष्मीकान्तं कमल नयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुं भव भय हरं सर्वलोकैक नाथम् || जिनका स्वरूप शांत है॰ जो शेषनाग पर विश्राम तथा बैठते है, जिनकी नाभि में कमल है और जो देवताओं के भी देव है।जो पूरे ब्रह्मांड तथा विश्व को किए हुए है, जो सर्वत्र व्याप्त एवं विद्यमान है, जो नीलमेघ के समान धारण नील वर्ण वाले है और जिनके अङ्ग अङ्ग शुभ एवं मनमोहक है। जो लक्ष्मीजी के स्वामी हैं, जिनके नेत्र कमल के समान कोमल है और योगी विष्णु  जिनका निरंतर चिंतन करते है। ऐसे भगवान श्री को में प्रणाम करता हूं, जो सभी भय को हरते, नष्ट करते है तथा जो सभी लोकों के स्वामी है, पूरे ब्रह्माण्ड के ईश्वर है॰ को मैं प्रणाम करता हूं शान्ताकारं भुजग शयनं पद्मनाभं सुरेशम् विश्वाधारं गगन सदृशं मेघ वर्णं शुभाङ्गम् | लक्ष्मीकान्तं कमल नयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुं भव भय हरं सर्वलोकैक नाथम् || जिनका स्वरूप शांत है॰ जो शेषनाग पर विश्राम तथा बैठते है, जिनकी नाभि में कमल है और जो देवताओं के भी देव है।जो पूरे ब्रह्मांड तथा विश्व को किए हुए है, जो सर्वत्र व्याप्त एवं विद्यमान है, जो नीलमेघ के समान धारण नील वर्ण वाले है और जिनके अङ्ग अङ्ग शुभ एवं मनमोहक है। जो लक्ष्मीजी के स्वामी हैं, जिनके नेत्र कमल के समान कोमल है और योगी विष्णु  जिनका निरंतर चिंतन करते है। ऐसे भगवान श्री को में प्रणाम करता हूं, जो सभी भय को हरते, नष्ट करते है तथा जो सभी लोकों के स्वामी है, पूरे ब्रह्माण्ड के ईश्वर है॰ को मैं प्रणाम करता हूं - ShareChat