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#जय श्री कृष्ण यमुना नदी का जल कभी निर्मल और शीतल हुआ करता था। किन्तु एक दिन वहाँ कालिया नामक विषैला नाग आ गया। उसके ज़हर से यमुना का पानी काला पड़ गया, मछलियाँ मरने लगीं और गाय–ग्वालों का जीवन संकट में आ गया। ब्रजवासी भयभीत होकर बोले — "अब इस नदी से कोई भी पानी नहीं पी सकता!" बालक कृष्ण सब देख रहे थे। वे मुस्कराए और यमुना के तट पर पहुँचे। देखते ही देखते वे जल में कूद पड़े। अंदर कालिया नाग ने कृष्ण को अपने फनों में जकड़ लिया। यमुना में हलचल मच गई। सब घबरा गए — "हमारा कन्हैया!" लेकिन तभी चमत्कार हुआ ✨ कृष्ण फन से निकलकर कालिया के ऊपर नृत्य करने लगे। हर कदम पर उसका अहंकार टूटने लगा। कालिया तड़प उठा, उसकी शक्ति समाप्त होने लगी। तभी उसकी पत्नियाँ हाथ जोड़कर बोलीं — "हे प्रभु! हमारे स्वामी को क्षमा करें!" श्रीकृष्ण करुणामय थे। उन्होंने कहा — "कालिया, तुम इस नदी को छोड़ दो और समुद्र में जाकर रहो।" कालिया ने सिर झुकाया और यमुना छोड़कर चला गया। यमुना फिर से पवित्र और निर्मल हो गई। 🌊 ब्रजवासी खुशी से झूम उठे — "जय कन्हैया!" 🌟 सीख: ईश्वर अहंकार को नष्ट करते हैं और भक्तों की रक्षा करते हैं
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