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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - गज़ल जिंदगी का भरोसा नहीं है। मौत कोई शगूफ़ा नहीं है।। है ~ ये दोनचार दिन जिंदगानी। नाम बाक़ी किसी का नहीं है।। एक दिन तुझको जाना है लाज़िम। सोचता~~~ है के मरना नहीं है।। है~~ भलाई तो परदे में लेकिन। दुनिया दारी का परदा नहीं है।l क्यूं बुराई पे उतरा है ज़ालिम। ज़ुल्म का कोई चारा नहीं है।। ये~ न जानो के दुनिया है मेरी। इसमें कोई किसी का नही है।। देखो इस्हाक़ मतलब की ख़ातिर। भाई~~~भाई का होता नहीं है।। M ISHAQ. MULTANI Youri uotein App Want Motivational Videos गज़ल जिंदगी का भरोसा नहीं है। मौत कोई शगूफ़ा नहीं है।। है ~ ये दोनचार दिन जिंदगानी। नाम बाक़ी किसी का नहीं है।। एक दिन तुझको जाना है लाज़िम। सोचता~~~ है के मरना नहीं है।। है~~ भलाई तो परदे में लेकिन। दुनिया दारी का परदा नहीं है।l क्यूं बुराई पे उतरा है ज़ालिम। ज़ुल्म का कोई चारा नहीं है।। ये~ न जानो के दुनिया है मेरी। इसमें कोई किसी का नही है।। देखो इस्हाक़ मतलब की ख़ातिर। भाई~~~भाई का होता नहीं है।। M ISHAQ. MULTANI Youri uotein App Want Motivational Videos - ShareChat