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🍃🌸🍃🌸 सीताराम 🌸🍃🌸🍃 *'तस्मिन् तज्जने भेदाऽभावात्'* (नारद भक्तिसूत्र/श्लोक ४१) अर्थात् भगवान और उनके भक्त में भेद नहीं। *अतुलितबलधामं स्वर्णशैलाभदेहं* *दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्‌।* *सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं* *रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥* (५/मंगलाचरण/श्लोक ३) उपरोक्त *सुंदरकाण्ड के मंगलाचरण श्लोक* में *श्रीहनुमानजी* के चार विशेषणों ( *अतुलितबलधामं, दनुजवनकृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम्‌ तथा सकलगुणनिधानं*) को देखा जाये तो श्रीमानसजी में *श्रीरामजी* तथा *श्रीरामलक्ष्मणजी* के लिये बिल्कुल समान दिया हुआ है।👇🏻 १- *अतुलितबलधामं -* श्रीरामजी - *अतुलित भुज प्रताप बल धामः।* कलि मल विपुल विभंजन नामः। (३/१०/८) श्रीरामलक्ष्मणजी - *अतुलित बल प्रताप द्वौ भ्राता।* खल बध रत सुर मुनि सुखदाता॥ (३/२१/४) चले राम त्यागा बन सोऊ। *अतुलित बल नर केहरि दोऊ॥* (३/३६/१) २- *दनुजवनकृशानुं -* श्रीरामजी - संसय सोक निबिड़ तम भानुहि। *दनुज गहन घन दहन कृसानुहि ।।* (७/२९/४) श्रीरामलक्ष्मणजी - जय रघुबंस बनज बन भानू। *गहन दनुज कुल दहन कृसानू ।।* (१/२८५/१) ३- *ज्ञानिनामग्रगण्यम्‌ -* श्रीरामजी - यह प्राकृत महिपाल सुभाऊ । *जान सिरोमनि कोसलराऊ ।।* (१/२७/५) *ग्यान निधान अमान मानप्रद।* पावन सुजस पुरान बेद बद।। (७/३३/३) श्रीरामलक्ष्मणजी - तब रिषि निज नाथहि जियँ चीन्ही। *बिद्यानिधि* कहुँ बिद्या दीन्ही॥ (१/२०८/४) कुन्देन्दीवरसुन्दरावतिबलौ *विज्ञानधामावुभौ* (४/मंगलचरण श्लोक १) ४- *सकलगुणनिधानं -* श्रीरामजी - *गुन सील कृपा परमायतनं।* प्रनमामि निरंतर श्रीरमनं। (७/१३/छंद१०) श्रीरामलक्ष्मणजी - *गुन सागर नागर* बर बीरा । सुंदर स्यामल गौर सरीरा।। (१/२४०/१) *बिनय सील करुना गुन सागर ।* जयति बचन रचना अति नागर ।। (१/२८४/२) *जय जय सियाराम 🙏🏻🙏🏻* #जय बजरंगबली
जय बजरंगबली - पिशाच निकट नहिं आवै, "भूत श्री २म RI महावीर जब नाम सुनावै। नासै रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा।।  जय श्री 0 हनुम्नान 33 $ 39 4 A 1 पिशाच निकट नहिं आवै, "भूत श्री २म RI महावीर जब नाम सुनावै। नासै रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा।।  जय श्री 0 हनुम्नान 33 $ 39 4 A 1 - ShareChat