#श्री हरि विष्णु
🌹ॐ नमो नारायणाय🌹
🌵कोई भी व्यक्ति बहुत ज्यादा बोलते रहने से कुछ नहीं सीख पाता, समझदार व्यक्ति वही कहलाता है जोकि धीरज रखने वाला, क्रोधित न होने वाला और निडर होता है।
🍂आप सिर्फ उसे ही खोते हैं जिससे आप चिपके रहते हैं।
🌿एक मोमबत्ती हजारों मोमबत्तियों को रौशन कर सकती है, और फिर भी उस मोमबत्ती की उम्र कम नहीं होती। उसी तरह से खुशियां भी बांटने से भी कम नहीं होती हैं।
🌹जीवन में कुछ भी स्थाई नहीं है। इस बात को मान ही लो।
🍀यदि अपने हितकारी प्रभु पर आपका विश्वास बढ रहा है तो समझ लेना कि भगवान ने आपकी प्रार्थना स्वीकार कर ली है। यदि इसमें विलम्ब हो रहा है, तो समझो आपके धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। और यदि आपकी प्रार्थना का उल्टा प्रभाव पङ रहा है, तो भी यह मत समझना कि वे नाराज हैं। बल्कि वे आपके लिए बेहतर मार्ग तैयार कर रहे हैं। हमेशा अपने आराध्य पर विश्वास करो वे कभी निराश नहीं करते।
"तू आवे एक पग, मैं आऊं पग चार"
"हे अर्जुन! तू निश्चयपूर्वक जान, मेरा भक्त कभी नष्ट नहीं होता"
🌾पानी सब को एक समान मिलता है लेकिन फिर भी करेला कडवा, बेर मीठा और इमली खट्टी होती है यह दोष पानी का नही है, बीज का है। वैसे ही भगवान सबके लिए एक समान है लेकिन दोष कर्मो का है।
" जो बोएगा वही पाएगा। तेरा किया आगे आएगा। सुख-दुख है क्या, फल कर्मो का। "जैसी करनी वैसी भरनी"
🌱गुस्से को अपने भीतर रखना ऐसा ही है जैसे आप जहर तो खुद पियें और किसी दूसरे आदमी के मरने की उम्मीद करें।
🌴जिस व्यक्ति के विचार मैले हैं जो लापरवाह है और धोखे से भरा हुआ है, वह गेरुआ वस्त्र कैसे पहन सकता है? वह व्यक्ति जिसने खुद पर नियंत्रण हासिल कर लिया है, ओजस्वी है, स्पष्ट है, सच्चा है, वही गेरुआ वस्त्र पहनने के लायक है।
🍁हम जो शब्द बोलते हैं उनका चुनाव हमें बड़ी सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि उन शब्दों को सुनने वाले व्यक्तियों पर उनका प्रभाव पड़ता है फिर चाहे वह प्रभाव अच्छा हो अथवा बुरा।
🌻अच्छे व्यवहार का कोई आर्थिक मूल्य भले ही न हो लेकिन आपका अच्छा व्यवहार करोड़ों दिलों को खरीदने की शक्ति रखता है।
🌼भानु पीठि सेअइ उर आगी।स्वामिहि सर्व भाव छल त्यागी।
सूर्य का सेवन पीठकी ओर से और आग का सेवन सामने छाती की ओर से करना चाहिये। किंतु स्वामी की सेवा छल-कपट छोड़कर समस्त भाव, मन, वचन, कर्म से करनी चाहिये।
🌾हित मत तोहि न लागत कैसे।काल विबस कहुॅ भेसज जैसे।
भलाई की बातें उसी प्रकार अच्छी नहीं लगती है जैसे मृत्यु के अघीन रहने बाले व्यक्ति को दवा अच्छी नहीं लगती है।
🌴उमा संत कइ इहइ बड़ाई।मंद करत जो करइ भलाई।
संत की यही महानता है कि वे बुराई करने वाले पर भी उसकी भलाई हीं करते हैं।
🍀 बोल हरि बोल हरि हरि हरि बोल केशव माधव गोविंद बोल।🍀


