"दिल हाँथी
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बढ़ा इश्क में इस
कदर कसमकस,
दिल बेचारा बस
कूद-कूद आवाज करे!
जब पूरी करने को
कुछेक ख्वाहिशें,
साँसें जबरन ही
धड़कन पर यूँ राज करे!
कहीं भी उलट-पलट
चढ़ जाए जब,
छटपटाए बड़बस ही
ये बकवाश करे!
कमबख्त दौड़ लगाए
ये घण्टों बैठे,
और तैर पोखर में
कहीं आराम करे!
यों कलाबाजियाँ है
इसके ऐसे-ऐसे,
जोरों से उछले खुदे
और धूमधाम करे!
और कभी दुबककर
कोने में पागल,
पंछी सा घोंसले में
चुपके से शाम करें!
बेदर्दी कभी भागे तो
कभी ये छिटके,
कभी-कभी तो
खुद बहुत ही नाम करें!
आँवारा होकर बस
हुल्लड़ बन जाए,
और अल्हड़ बनकर भी
ये खुदको बदनाम करे!
जब ना कुछ पूछे
और ना कुछ समझे,
बस बैठे-बैठे
खुद से ही तकरार करे!
हो दिल बेदर्दी जब
छोटे से बच्चे सा ही,
तब आदमी कैसे
आसानी आराम करे!
जब की पंखुरी ही,
सामने से दिख जाए!
तब कैसे दिल हाथी भी
बरबस यूँ ही आराम करे!💕💞
....✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳
#💔पुराना प्यार 💔 #💝 शायराना इश्क़ #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #❤️Love You ज़िंदगी ❤️


