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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - ]0110 1 AழBIAII LUI बच्चों को समझाया जाए कि वास्तविकता से कटें नहीं भी उठाते हैं। दुनिया के सारे ही चिराग रोशनी देने के साथ साथ धुआं प्रकाश पाना चाहते हैं तो धुएं की तैयारी भी रखिए। केवल सूर्य का प्रकाश नहीं होता। और उसमें जो तपिश है, वो भी ऐसा है, जिसमें धुआं #ಗ್ स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बन जाती है। इन दिनों हमारे हाथ में चिराग है, जिसको सोशल मीडिया कहा जाता है। 9 से १० घंटे टाइम वाले बच्चे इस चिराग से रोशनी कम पा रहे हैं और झुलस ज्यादा रहे हैं। दो बड़े खतरे बच्चों के जीवन में उतर गए। पहला, वो परिवार से रहे हैं और दूसरा, असली दुनिया से कट रहे हैं। जीवन में फैंटसी दूर हो कुछ समय के लिए जरूरी है पर यथार्थ का सामना, यथार्थ में जीना ही जीवन का सच है। तो बच्चों को यह कैसे समझाया जाए कि वास्तविकता से कटो मत। एक बात उन्हें जरूर समझाएं कि सबसे बड़ी वास्तविकता है- आत्मा। उसका अगला कदम है परमात्मा। बाकी सारी दुनिया आनी-्जानी है। तो सोशल मीडिया जैसी विध्वंसक ताकत से बच्चे स्वयं को कैसे बचाएं इसके उन्हें आत्मा का स्वाद चखाया लिए जाए। और आत्मा का स्वाद ध्यान से मिलता है। ]0110 1 AழBIAII LUI बच्चों को समझाया जाए कि वास्तविकता से कटें नहीं भी उठाते हैं। दुनिया के सारे ही चिराग रोशनी देने के साथ साथ धुआं प्रकाश पाना चाहते हैं तो धुएं की तैयारी भी रखिए। केवल सूर्य का प्रकाश नहीं होता। और उसमें जो तपिश है, वो भी ऐसा है, जिसमें धुआं #ಗ್ स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बन जाती है। इन दिनों हमारे हाथ में चिराग है, जिसको सोशल मीडिया कहा जाता है। 9 से १० घंटे टाइम वाले बच्चे इस चिराग से रोशनी कम पा रहे हैं और झुलस ज्यादा रहे हैं। दो बड़े खतरे बच्चों के जीवन में उतर गए। पहला, वो परिवार से रहे हैं और दूसरा, असली दुनिया से कट रहे हैं। जीवन में फैंटसी दूर हो कुछ समय के लिए जरूरी है पर यथार्थ का सामना, यथार्थ में जीना ही जीवन का सच है। तो बच्चों को यह कैसे समझाया जाए कि वास्तविकता से कटो मत। एक बात उन्हें जरूर समझाएं कि सबसे बड़ी वास्तविकता है- आत्मा। उसका अगला कदम है परमात्मा। बाकी सारी दुनिया आनी-्जानी है। तो सोशल मीडिया जैसी विध्वंसक ताकत से बच्चे स्वयं को कैसे बचाएं इसके उन्हें आत्मा का स्वाद चखाया लिए जाए। और आत्मा का स्वाद ध्यान से मिलता है। - ShareChat