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#संध्या आज प्रसन्न है
संध्या आज प्रसन्न है - पहले शिशु के जन्म दिवस पर शकुर भरी कोई माँ पलना झुलवाए ' फूलीनसी वैसे ही बस संध्या आज प्रसन्न है पश्चिम के गालों पर लाली दौड़ गई चित्रकार सूरज अब शयनागार चला शृंगों को दे दिए मुकुट जाते जाते चंचल लहरों के मुख पर सिंदूर मला पहले कश्ती को उतारते सागर में मछुअन तिलक करे माँझी को फूलीनसी वैसे ही बस संध्या आज प्रसन्न है गोधूली क्या केसर घुली समीरण में गाय रंभायी , गूँजे शंख शिवालों से  रामधुन गाते लौटे नीड़ों को নি্যা' के स्वर फूटे चौपालों से HIqU मनचीते हाथों से माँग सिंदूर भरे कोई दुलहन डोली बैठे फूली सी वैसे ही बस आज संध्या प्रसन्न है निकला संध्या-तारा दिशा सुहागन है शलथ तन पर ममता का आँचल डाल रही आँगन बालक जुड़े कहानी सुनने को पहले शिशु के जन्म दिवस पर शकुर भरी कोई माँ पलना झुलवाए ' फूलीनसी वैसे ही बस संध्या आज प्रसन्न है पश्चिम के गालों पर लाली दौड़ गई चित्रकार सूरज अब शयनागार चला शृंगों को दे दिए मुकुट जाते जाते चंचल लहरों के मुख पर सिंदूर मला पहले कश्ती को उतारते सागर में मछुअन तिलक करे माँझी को फूलीनसी वैसे ही बस संध्या आज प्रसन्न है गोधूली क्या केसर घुली समीरण में गाय रंभायी , गूँजे शंख शिवालों से  रामधुन गाते लौटे नीड़ों को নি্যা' के स्वर फूटे चौपालों से HIqU मनचीते हाथों से माँग सिंदूर भरे कोई दुलहन डोली बैठे फूली सी वैसे ही बस आज संध्या प्रसन्न है निकला संध्या-तारा दिशा सुहागन है शलथ तन पर ममता का आँचल डाल रही आँगन बालक जुड़े कहानी सुनने को - ShareChat