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#आज का मंत्र
आज का मंत्र - आज का मंत्र एतासु केतकिलतासु विकासिनीषु सौभाग्यमद्भुतातरं भवति विभर्ति। यत्कांतकैर्व्यतितमात्मवपूर्ण जनं त्वमेव सेवितुमुपक्रमते द्विरेफःIl ঋণাথ: केतकी के फूल, कांटों से भरे होने के बावजूद बेहद आकर्षक ढंग से खिलते हैं। मधुमक्खी दर्द से बेखबर होकर बार-्बार लौटती रहती है। ठीक उसी प्रकार, एक समर्पित आत्मा कष्टों की परवाह किए बिना ईश्वर की खोज में लगी रहती है @myquote आज का मंत्र एतासु केतकिलतासु विकासिनीषु सौभाग्यमद्भुतातरं भवति विभर्ति। यत्कांतकैर्व्यतितमात्मवपूर्ण जनं त्वमेव सेवितुमुपक्रमते द्विरेफःIl ঋণাথ: केतकी के फूल, कांटों से भरे होने के बावजूद बेहद आकर्षक ढंग से खिलते हैं। मधुमक्खी दर्द से बेखबर होकर बार-्बार लौटती रहती है। ठीक उसी प्रकार, एक समर्पित आत्मा कष्टों की परवाह किए बिना ईश्वर की खोज में लगी रहती है @myquote - ShareChat