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गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - क़तील शिफ़ाई गज़ल सरहदों है विसाल तेरा पलट 3 गया तक कर जमाल a & € & f बिखेरा पे निगाहों 8 जो পলয गया কমাঁ   কী   বুল্ক   কঙাঁ तीरा - नसीबों सिवाए ಫ बादल मिरी जिसे अँधेरा वही ने है पलट गया గౌ पुकारा न छाँव करने को है वो आँचल न चैन लेने को हैं वो बाँहें मुसाफ़िरों   के 31   ಹಾ೯ತಫ   ವಾT ೯ क़रोब पलट गया मिरे #   37 . डूबी ক যমী ক  आहट तसव्वुर हज़ार जाने   शाम-ए-्अलम से मिल  8 कहाँ सवेरा  पलट ಹ मिला मोहब्बत का रोग जिस को क़तील कहते हैं लोग जिस को ক নযী   যলী   8 वही নী दीवाना फेरा কয का पलट Moiivatioral Vicleos Appl Want क़तील शिफ़ाई गज़ल सरहदों है विसाल तेरा पलट 3 गया तक कर जमाल a & € & f बिखेरा पे निगाहों 8 जो পলয गया কমাঁ   কী   বুল্ক   কঙাঁ तीरा - नसीबों सिवाए ಫ बादल मिरी जिसे अँधेरा वही ने है पलट गया గౌ पुकारा न छाँव करने को है वो आँचल न चैन लेने को हैं वो बाँहें मुसाफ़िरों   के 31   ಹಾ೯ತಫ   ವಾT ೯ क़रोब पलट गया मिरे #   37 . डूबी ক যমী ক  आहट तसव्वुर हज़ार जाने   शाम-ए-्अलम से मिल  8 कहाँ सवेरा  पलट ಹ मिला मोहब्बत का रोग जिस को क़तील कहते हैं लोग जिस को ক নযী   যলী   8 वही নী दीवाना फेरा কয का पलट Moiivatioral Vicleos Appl Want - ShareChat